अश्क आँखों के.....
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अश्क जो ह्रदय तल में छुपे रह जातें,
मौनआँखों से मन की पीड़ा कह जाते,
ह्रदय की पीर से पलकों की कोर नम होती,
मधुमास भी पतझड़ सरीखे लग जाते !!
🌷उर्मिला सिंह
Sunday, 31 March 2019
अश्क पतझर सरीखे लग जाते.......
Saturday, 23 March 2019
शहीदों को नमन है शत शत नमन है
शहीदों को नमन है नमन है
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घायलों की सिसकियों में
गूँजता बन्दे मातरम का स्वर है
शहीदों को नमन करता ......
भारत का कण -कण है!!
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🌷उर्मिला सिंह
Wednesday, 20 March 2019
होली प्रेम सद्भावना का प्रतीक है हिलमिल कर त्योहार मनाने की प्रथा है।
होली की बौछार मन के रंगों के साथ
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सतरंगी बौछार आज की होली है
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मन करता अल्हड़ सी बाला बन जाऊँ आज ,की होली है
तन मन फाग रंग में रंग जाये आज ,की होली है
रंगों की बौछार से धरती अम्बर हुवा लाल आज कीहोली है
बागों में अमिया महके कोयल छेड़े तान आज की होली है !!
कर लो पाक से अब दो - दो हाथ आज की होली है
सबक सिखाओ हत्यारों को मिलके आज की होली है।
हुवा खूब आदर्शवाद, सिंह नाद करो आज की होली है
घर के गद्दारों को करदो मटिया मेट आज की होली है!!
गुझिया की मिठास से मन होजाये गुलजारआज की होली है
ईर्ष्या द्वेष का करो हवन हिलमिल गावो फाग आज होलीहै!
🌷उर्मिला सिंह
Friday, 15 March 2019
वादे करके मुकर जाना तेरी फ़ितरत है
बातें अपनी हद से ज्यादा न किया किजीये
जो निभा न सकें ऐसा वादा न किया किजीये!!
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🌷 उर्मिला सिंह
Saturday, 9 February 2019
सरस्वती वंदना.....
हे वीणा वादनी हे ज्ञान दायनी
हे हँसवाहनी हे मात शारदे
निर्मल पावन जीवन कर दे!
है वीणा वादनी वर दे...वर दे...!
है दयामयी है , मातु सरस्वती
है जगद वयापिनी,हेआदिशक्ति
है मात शारदे!अन्तर्मन ज्योतिर्मय कर दे!
है वीणा वादनी वर दे....वर दे....!
है अभयदायनी, स्फ़टिकमाल धारणी
है स्वेतवस्त्र धारणी है मात भवानी
साहस ,सयंम, उल्लसित जीवन कर दे
सदा विराजे मम उर,चाह यही पूरी कर दे!
पूजन अर्चन जानू ना माँ जानू ना धर्म कर्म
चरणों में रख जीवन पावन कर माँ
वाणी में रस, कलम में ज्ञान भर दे माँ
हे वीणा वादनी वर दे.....वर दे......!
हे हंसवाहिनी वर दे.......वर दे.......!
🌷उर्मिला सिंह
नज़र.....
नज़र मिली,नजर से जब ,मन को
अच्छा लगता है!
नजरों को नित ख्वाब देखना तेरा
अच्छा लगता है!
नजर,नजऱ की गुफ़्तगू स्वासों का बढ़ना
अच्छा लगता है!
मधुमास,में कोयल की कूक ह्रदय को
अच्छा लगता है!
नजर झील में प्रीत कमल का खिलना
अच्छा लगता है!
मौन अधर मुग्ध नजर की भाषा पढ़ना
अच्छा लगता है !
खनके नूपुर महावर के,अकुलाना तेरा
अच्छा लगता है !
प्रीत की मादकता में नज़र का झुक जाना
अच्छा लगता है !
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🌷 उर्मिला सिंह
Thursday, 31 January 2019
यादें.....
यादों पर किसी का वश नही चलता है।ये दिल के झरोखे से झांकती है जब तो शब्द पन्नो पर बिखर ने लगतें हैं.......।
यादें.........
आज फिर चाँद से यादों का धुवां उठता है
चाँदनी आज फिर याद में तेरे जलना है
आज फिर उलझी उलझी सी सांसे भारी हैं
काच से ख्वाबों की बिखरने की आवाज आई है!!
🌷उर्मिला सिंह