वक्त का इंतज़ार कर वक्त गूँगा नही मौन होता है!
वक्त की बोली जब निकले पूरी ललकार से निकले!
रण में विजयी होना है गर लक्ष्य साध कर निकलें
बुलंद हौसलों में अपने विजय की धार से निकलें!!
अभिमानी ताकत फ़रिश्तों को भी शैतान बनाती है
दिलों पर राज करना हो ,नम्रता के शृंगार से निकलें!
चिराग तूफ़ानों में जला सको तो राहों पे आगे बढ़ो
बचाना है गर गद्दारों से,तूफ़ान में पतवार से निकलो!
उसूलों की ज़मीन बंजर होगई है ज़माने में
नई पौध के वास्ते,उसूलों की बीज लेके निकलो!
।।। उर्मिला सिंह