सागर लहरें

Sunday, 31 May 2020

रात के निमंत्रण पर....

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रात के निमन्त्रण पर तारे छा गए अम्बर पर चाँद  भी रुक न  पाया जब चाँदनी ने ...... आकर जाम छलकाया।। इश्क की दस्तक हुई पवन ने मीठी सुर छेड़ी  रा...
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Saturday, 30 May 2020

दीप शिखा का प्रणयी शलभ हूँ.....

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  मैं प्रीत से  सम्मोहित  शलभ हूँ    दीपशिखा का प्रणयी शलभ हूँ।     स्वर्णिम रूप से घायल ये दृग मेरे     प्रीत के रंग से रंगें ये मृदु पंख म...
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Wednesday, 27 May 2020

इंसानी छाप....

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हे प्रभू जब तुम अवतरित हुवे तो अपनी मुरली की छाप छोड़ गए माटी अपनी छाप छोड़ जाती है पक्षी भी जहां से उड़तें हैं वहां -- अपना पंख छोड़ देते हैं.....
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Tuesday, 26 May 2020

गतांक से आगे.......चुटकी भर सिंदूर.......

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चुटकी भर सिन्दूर..... गतांक से आगे....... परीक्षा समाप्त होते ही  क्षात्रावास से  क्षात्राएँ  धीरे धीरे घर जाने लगी। छात्रावास खाली होरहा था...
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Saturday, 23 May 2020

पद चिन्ह.....

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ख्वाबों के   ज़मीन पर जिंदगी की  बिखरी रेत पर कुछ पदचिन्ह  आज भी--  दिख रहें हैं   धुंधले- धुंधले..  शायद दर्द के   सागर ने अपना  अधिपत्य जमा...
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Tuesday, 19 May 2020

भूख से बेहाल तन...

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भूख से बेहाल तन ,भय से है गमगीन मन  ख़ामोशी का समंदर ,विषयुक्त हुवा पवन  सूनी राहें सन्नाटा पसरा ,ठिठका नज़र आता चाँद भी आती जाती सांसे ,गिन र...
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Saturday, 16 May 2020

एक पाती को मन तरसता....

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दिखता नही अब डाकिया  एक पाती को मन तरसता। एक पाती को मन तरसता काश मिल जाये बाँच लेता बीते दिनों के ख़ुशगवार पल को प्रिय ! मुट्ठियों में कैद क...
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उर्मिला सिंह
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