सागर लहरें

Sunday, 30 August 2020

गज़ल

›
वक्त का इंतज़ार कर वक्त गूँगा नही मौन होता है! वक्त की बोली जब निकले पूरी ललकार से निकले! रण में विजयी होना है गर लक्ष्य साध कर निकलें बुलंद ...
4 comments:
Monday, 24 August 2020

बाढ़ की विभीषका दानव की तरह मुंह फैलाये जन जीवन को त्रस्त कर रही है।उस समय की मनःस्थिति को चित्रित करती हुई रचना.....

›
कहीं बारिष का कहर  कहीं सूखे से त्रस्त जीवन तेरी माया तूं ही जाने भगवन कौन समझा ग़रीबी का सफऱ।। झोपड़ी कच्चे मकान ढह गये दाने-दाने को सब तरस र...
13 comments:
Wednesday, 19 August 2020

फुटपाथ बिछौना है....

›
जहां फुटपाथ बिछोना,आसमां छत है        वे जिन्दगी की क्या बात करे। उम्र तमाम हुई ,तन में साँस अभी बाकी है आंधी पानी ठंढ सहे ,खेल मौत का बाकी ...
10 comments:
Monday, 17 August 2020

जीवन क्या होता है.....

›
मर कर किसने देखा है जीवन क्या होता है जीवन जी कर देखो जीवन गुलजार होता है।। खिलता है फूल काटों में काटों की फिक्र नही करता सबके  सुख -दुख मे...
13 comments:
Friday, 14 August 2020

बड़ा नीक लागे हमार भारत देशवा.....

›
बड़ा नीक लागे ,हमार भारत देसवा... गंगा बहत हैं , जमुना बहत हैं.. और  बहै सरयू क  निर्मल धारा.... बड़ा नीक लागै..... सिरवा पे सोहेला मुकुट हिमा...
6 comments:
Friday, 7 August 2020

व्यथा के पन्नो पर......

›
व्यथा के पन्नो पर...... सदियों के बाद.... समझ में आई बात व्यथा के पन्नों पर किसने लिख दी रात।। पत्थर की  दीवारों पे किसने नाजुक फूल उकेरे तन...
14 comments:

इंसानियत का उजाला हो तो बेहतर है.....

›
दिल की गलियों में इंसानियत का उजाला हो तो बेहतर है करुणा,प्रेम रस से ह्रदय सिंचित हो तो बेहतर है। कलह से भरा घर भला खुशियों से आबाद कहाँ होत...
9 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

उर्मिला सिंह
View my complete profile
Powered by Blogger.