Sunday, 28 July 2019

उम्र की राह पर चलते -चलते थके कदम.....

चलते चलते.....
**************

चलते चलते थक रहे ..... मेरे पाँव को विश्राम  दे,
बयाबान मे दिखता नही , आँखों को प्रकाश दे!!
जिन्दगी की दहलीज पे पुकारती हर साँस है
चाहे जो तूँ , मेरी  मुश्किलों  से , मुझे  उबार  दे!!

मेरी -आस है विश्वास है  मेरी धड़कनो का तार है,
मेरी प्रीत का गीत है मेरे स्वरों  में  तूँ  ही तान है!!
अपने हाथों  में मेरा हाथ ले ...... मुझे बेखबर कर,
दुनियाँ की भीड़ में खो न जाऊँ .....  मुझे पहचान दे !!

अदृश्य है,  आसपास है, मुझे अनछुआ एहसास दे,
मेरे स्वप्न तेरे स्वप्न हो , सपनों  को आसमाँन दे,
तेरीे प्रीत में रँगी रहूँ .…..मुझमें ऐसा रंग भर!
मेरी मायूसियों को  .....खुशियों का आकार दे!!

मेरे शब्द शब्द गमक उठे....मेरी लेखनी को वरदान दे!!
अन्तर्गन का चक्षु खुल जाय .....बस यही इक चाह दे
,मन के मन्दिर में बसाऊँ ......  निहारा करूँ तुझे रात दिन
पुकार मेरी तुझ तक पहुँच सके...मेरी आवाज में वो दर्द दे!!

चलते -चलते थक रहे ...मेरे पांव को विश्राम दे.....

                         🌷उर्मिला सिंह

                                                 

Saturday, 20 July 2019

बारिष .....बूंदे.....और भींगता अहसास.....

बारिष..... बूंदे.....
*************

बूँदें बरसती हुई छूने को दौडती
कानों में .....कुछ कहती भिगोती
तुम्हारे यादों को अहसास में डुबो के
ख्यालों को हरी चुनर ओढाती

बूंदे.......

आह ....जब छुआ बूंदों ने,
एक अहसास हुआ तन को,
शायद तुम्हारे पास होने का अहसास,
लेकिन जब देखा तो तुम नही थे पास
बूंदे.....

गूंजित हुई कडकडाती बिजली,
चमकदार प्रकाश पंहुचा हर ओर
अचानक व्याप्त शांति में ,हुआ कुछ शोर
कौंधती किरणों ने ,आखों में सपना जगाया
आँखें बंद होते ही फिर ख्याल तेरा आया

बूंदे ....

ठंडी हवा का एक झोका सरसराया
रोम रोम जागृत हुवा बारिष ने मन को सहलाया
इस ठण्ड में मन ने कहीं उसकी छूअन का
गरम अहसास दिलाया ,आंखे खुलीं
पर अफ़सोस...यह सब कुछ नहीं..
बस थी अगर कुछ तो थी एक माया....केवल माया...

                  🌷उर्मिला सिंह
                                

Friday, 19 July 2019

अहसास जो जिन्दगी का अभिन्न अंग होता है, भुलाए से भी नही भूलता जो सासों के संग होता है.....

अहसा.......

दिल के तहखाने में छुपे हुवे कुछ एहसास.....
हर्फ...हर्फ...उसके,कागज पर उतार दिया
पर न जाने कब अश्कों का.....
समन्दर छलकने लगा.....
हर्फ़ गीले हो मिटने लगे.....
खामोशी.....जख़्मी होती रही
एहसास हिचकियाँ भर मरता रहा....

             🌷उर्मिला सिंह

Wednesday, 17 July 2019

चलो कुछ दिन जीने के लिये गांव की ओर चलतें हैं।

गांव की ओर.......

मन ने कहा....
चलो कुछ दिन जीने के लिये
गाँव की ओर चलते हैं
जंहा आज भी नीम के  नीचे
एक खटिया पड़ी होगी
जहाँ सूरज भोर में
झांकता होगा उन
शाखों के मध्य से
जहां किरणे पत्तियों की चलनी से
छन छन कर पड़ेगी तन मन पर
मीठी मीठी भोर
मीठी गुड़ की चाय
चलो कुछ दिन जीने के लिए
गांव की ओर चलतें हैं।

शाम होते ही
बदल जाता है माहौल
थके निढाल से बापू
जहां आकर खटिया पर से
गुड़ और एक लोटे पानी की
चाहत रखते थे
जहाँ सूरज के लुप्त होते ही
चाँद झांकने लगता है
आज भी सभी कुछ वैसा ही होगा
कुछ बदला होगा तो सड़कें
पनघट की जगह
हैंडपुम्प ने ले लिया होगा
पगडंडिया देती नही होंगी दिखाई
वही राम राम भैया कहना
सभी कुछ वैसा ही होगा
चलो कुछ दिन जीने के लिये
गांव की ओर चलते हैं।

हर रिस्ते जी भर के जीतें हैं
वहां रिस्तो में जीवन होता है
वहां मिट्टी में कर्म की खुशबू
आशा विश्वास आस्था का---
अद्भुत संयोग होता है
जहां प्राचीन संस्कृति की
आज भी झलक मिलती है
चलो कुछ दिन जीने के लिये
गांव की ओर चलते हैं।।

*****0*****
          🌷उर्मिला सिंह



Tuesday, 16 July 2019

जिन्दगी का कोई भरोसा नही.....प्रेम की मय पीते पिलाते रहें प्यार का आशियाना जगमगाते रहें

तै कुछ नही जिन्दगी
*****************

तैय कुछ नही जिंदगी प्यार की बाते करें ,
नजारों  बहारों  फूलों   की   बातें  करें !
आंखों  में  सपने  सुहाने  लिये चल पड़ें
मुक्कमल सफर लौटने की न बातें करें !

उमंग से भरे उम्र की सीढ़ियां  चढ़ते रहें !
बाहों  में आकाश ,चाहत  यही करते रहे !
इधर की ,उधर की बाते न कर मितवा मेरे,
प्रीत  के  गीत  साँस की  ताल पे सुनते रहे ,

पलों के फूल  वक्त की शाख पर रखते रहें ,
हम  गुजरे  जिधर से राहें  मुस्कुराने  लगे !
प्यार की मय ऐसी  पीलादे हमे  साथिया ,
झूम कर चले  सुरूर उसका न उतरे कभी  !

आज  जी भर जियें वक्त भी रश्क करता रहे ,
  रातरानी सा प्यार दिल में महकता रहे
भूल जायें दुनियाँ के रंजो गम पल दो पल
ओस में घुली.. प्रेम की डली...आंखों से...पीते रहें !

तैय कुछ नही जिन्दगी प्यार की बातें करें
नजरों  बहारों  फूलों  की  बातें  करें ......

                                                    #उर्मिल
 

Monday, 15 July 2019

गुरु की महत्ता.....

गुरु की महत्ता....
**************
गुरु शब्द बहुत महत्वपूर्ण होता है 'गु ' का अर्थ होता है- अंधकार... चाहे अज्ञान का हो चाहे अभिमान का हो !और 'रु' का अर्थ होता है - दूर करने वाला...!
जिसे हम इस प्रकार समझ सकतें हैं----
गु+रु=गुरु  ...यानी अंधकार को दूर करने वाला।
            प्राचीन काल से गुरु का महत्व रहा है श्री राम ने ऋषि वशिष्ठ एवम विश्वामित्र को गुरु बनाया था । हनुमान जी ने सूर्य देव को गुरु बनाया था तथा श्री कृष्ण जी ने  सांदीपनि को गुरु बनाया था।
           कहने का तातपर्य वैदिक काल से गुरु शिष्य की परम्परा चली आरही है।आज भी इन्सान गुरु की खोज में दरबदर भटकता है...!
              कहा गया है----
     बिन गुरु ज्ञान कहाँ से पाऊँ
     दीजो ज्ञान हरि गुन गाउँ।।                       

              गुरु जीवन में कई रूप में मिलतें हैं । बच्चा जन्म लेते ही माँ के रूप में,जीविका प्राप्त करने के लिये शिक्षक के पास विद्यार्थी रूप में  कुछ पाने के लिये जाता है ...। परन्तु शिष्य स्वयम को प्रभु चरणों में समर्पित करने की कला सीखने सद्गुरु के पास जाता है।
              सद्गुरु मन को संसार से विलग नही वरन शिष्य को संसार में रहकर हर कार्य प्रभु चरण में समर्पित करने का उसे सन्देश देता है , समाज सेवा का कार्य करने की प्रेरणा और ज्ञान देता है। सद्गुरु सूरज की तरह होता है, जिसके सदवचनो से अन्तस् का दिया जल जाता है...।
उसका एक- एक शब्द ह्रदय रूपी वीणा पर पड़ते ही उर का तार सद्भावों से झंकृत हो उठता है , तमस दूर हो जाता है ...।
              ऐसा, गुरु,सद्गुरु के वचनों का प्रभाव होता हैं।

               गुरु की महत्ता का कबीर जी ने इस प्रकार दर्शाया है:-

गुरु  गोविंद  दोनों  खड़े, काके  लागूं  पाय ।
बलिहारी गुरु आपकीे, गोविंद दियो बताय।।
          
                    ****0*****

सीधे  देख  न  पाई प्रभु को, गुरु मेरा दर्पण बन गया।
बलिहारी सद्गुरु को असम्भव को सम्भव कर दिया।।
                    
                    ****0*****  
                  
                                              🌷उर्मिला सिंह                                        
                          

सखी री .....मेघा... आये द्वार

सखी री.....मेघा आये द्वार....
**********************

सखी री ..... मेघा आये द्वार...!
मदमाती गाती शीतल बहत बयार!!
सखी री....मेघा आये द्वार...!!

ढोल बजावत बदराआये!
टिप..टिप बूँदन के सुर साजे!
तृषित धरा लेत अँगड़ाई!
श्रावण करत श्रृंगार.....!!
सखी री....मेघा आये द्वार...!!

रात अँधेरी दामिनी चमके!
दादुर मुखर भये चहुँ ओरे!!
डार पात छुपि कोयल बोले!
ठमक ठमक नाचत बन मोर!!
सखी री ...मेघा आये द्वार....!!

हर्षित ताल तलैया....!
प्रकृति रही मुस्काय...!!
बाँकी चितवन नदिया झूमत!
नाविक छेड़े ...तान मल्हार....!!
सखी री....मेघा आये द्वार....!!

              #उर्मिल