Monday, 22 December 2025
अजीब दुनिया,अजीब लोग हो गए,जो बड़े थे वो आज छोटे हो गए।रिश्ते परिंदे बन उड़ चले.....हम सहमें- सहमें देखते रह गए।रफ़्तार- ए जिन्दगी इस कदर तेज हो गई,जो आगे चल रहे थे वो पीछे हों गए। जिंदगी के सफ़र मेंअकेले रह गए....टूटते..बिखरते..सम्हलते रहगए। स्वार्थी दुनिया केभ्रम में जीते रहे...उम्मीदों का जनाजा,धूम धाम धाम से देखते रह गए। उर्मिला सिंह
Monday, 8 December 2025
हमदर्द
हमदर्द.... ..
अश्कों को हमदर्द बना
दर्द गले लगातें हैं
मुझसे मत पूछो दुनिया वालों
अधरों पर मुस्काने
किस तरह सजातें हैं।।
फूलों की चाहत में
काटों को भूल गए
आहों ने जब याद दिलाया
सन्नाटों से समझौता कर बैठे।।
सन्देह के घेरे में जज्बात रहे
लम्हे अपने,अपने न रहे
फरियादी फरियाद करे किससे
जब कातिल ही जज की ......
कुर्सी पर आसीन रहे....
लफ्जों में पिरोतें हैं
एहसासों के मोती
संकरी दिल की गलियों में
कौन लगाता कीमत इनकी।।
निद्र वाटिका में
अभिलाषाएं मचलती
जीवन से जीवन की दूरी
दूर नही कर पाती हैं....
फिर भी देहरी पर
उम्मीदों के दीप जलाती है।।
उर्मिला सिंह
Monday, 1 December 2025
सुस्त कदम मेरे
सुस्त कदम मेरे....
🌺🌺🌺
चलते चलते,....
रुक जाते ....
एक मोड पर ये
थके थके, रुके रुके
अलसाए ...
सोचों में हैं खोए
कौन डगर जाऊं
कुछ समझ न पाए
ये सुस्त कदम मेरे।
पांवों की सुस्ती
दिल दिमाग पर छाती
हर राह यहां अब
लगती है बेगानी
जर्जर नैया
डोल रही
भव सागर में
ना कोई खेवैया
सोच में डूबी
नश्वर काया ....
तेरा मेरा बहुत किया
क्या पाया क्या खोया
इस जग से
सिर धुन धुन पछताता क्यों
सुस्त थके ...कदम मेरे....
उर्मिला सिंह