अहम से दूर हौसला बनाये रखना
क्षमा का भाव दिल में बसाये रखना
नफ़रतों का अंकुर फूटने न पाये कभी
जमीं पर प्रेम की पौध लहलहाए रखना
****0****
#उर्मिल
अहम से दूर हौसला बनाये रखना
क्षमा का भाव दिल में बसाये रखना
नफ़रतों का अंकुर फूटने न पाये कभी
जमीं पर प्रेम की पौध लहलहाए रखना
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#उर्मिल
अंतर्गगन का परत दर परत अँधेरा हटा, ज्ञान बीज अंकुरित होने लगा है
सम्पुटित उर कमल को हौले हौले छू के
रश्मियाँ खिलाने लगी
दिल- के शाखों की झूमने लगी आज डारी डारी
चहचहाता है मन का पक्षी ,उल्लसित लगने लगा है सबेरा
ऊर्जा कीअटखेलियों से सुधा सिचित हो गया हृदय कोना कोना
खुल गई दिल की खिडकियाँ सुरभित पवन का आया झकोरा
दिशाओं ने मधुर विमल सन्देशा है भेजा
आज आनन्द जल से नयन है छलकते विकल मन प्राण आज कैसा ये विश्राम पाया!
दृग जल की मसि बना ,
पल पल के उड़ते पन्नो पर-
सुधियों की कलम से,
स्वांसों के अक्षर लिखती हूँ !
प्रिय याद तुम्हे हर क्षण करती हूँ !!
कैसे भेजूँ सन्देश तुझे ,
मन ही मन बाते करती हूँ ;
जब राह नही मिल पाती है ,
आँखों से झर झर आँसू बहते है !
प्रिय याद तुम्हे हर क्षण करती हूँ !!
स्वर साधना में भी मेरे ,
प्रिय ! गीत विरह के होते है ;
नज़रों से तुम ओझल होते ,
अंतर्मन में ही रहते हो
यादों की शीतल छाया
महसूस हमेशा करती हूँ
असह्य वेदना उर में गुंजित होती!
प्रिह याद तुम्हे हर क्षण करती हूँ!!
#उर्मिल