Wednesday, 26 September 2018

हाले दिल ...

दास्ताँने इश्क सुनायेंगे आज सुनिये  की न सुनिए!
हाले दिल सुनायेंगे,अश्फाक करिये की न करिये!!

जुर्में वफ़ा करतें हैं ,तेरी नफ़रत को आजमाएंगे!
दर्दे दिल सुनाएंगे ,इनायत करिये की न करिये !!

आईना बना के तुझको, रूबरू किया ज़िगर को!
तेरी तस्वीर है ज़िगर में सजाइये  की न सजाइये!!

दर्द के अंधेरे  रफ़्ता रफ़्ता आग़ोश  में लेने लगे!
अब जिन्दगी में चाँदनी रात करिये की न करिये !

मुंतशिर हुवा  ख़्वाबों का नगर ठहरे हुवे हैं  गम!
अलविदा से पहले सलाम कबूल करिये की न करिये!
    🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
   
                                           🌷ऊर्मिला सिंह

Tuesday, 25 September 2018

मन ने आवाज दी.....

कभी कभी मन कुछ कहना चाहता है पर कहाँ .....किससे..... तब कागज के निर्जीव पन्नों पर आपने भाओं को उकेर कर........!

मन ने आज आवाज दी
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

मन ने आवाज दी आ फिर कोई नज़्म लिखें....,
दर्द से भरी आँखे को शायद सुकून आजाये!
ये जख्मों का ज़खीरा चल  कहीं और छुपा दे,
या इन्हें पन्नों के हवाले कर पलको को सहलाये!
भीगीं नज़्म शबनमी बूंदों से लिख लबों पे सजाये.....!
आज फ़िर कोई नज़्म लिखे और गुनगुनाये....!

                                      🌷ऊर्मिला सिंह

Sunday, 23 September 2018

शब्द.

शब्द फूल से नाज़ुक पत्थर से कठोर होते हैं ,ये यदि दुसरों को मायूस करते हैं ,तो स्वयम के मन को भी अशान्त करतें हैं ।
***********************************
                      शब्द......

शब्द ,शब्द ही नही व्यक्तित्व का आईना होता है
शब्द भाओं में ढल अर्चना और अरदास होता हैं!
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
शब्दों के जलवे न पूछो कभी तीर कभी गुलाब है,
शब्दों से चन्दन की शीतलता  का आभास होता है!
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
सम्वेदनाओं से अभिभूत  शब्द  दर्द का उपचार है,
शब्द से नफ़रत तो शब्द ही प्रेम का उपहार होता है!
                       ***0***
                      
                                  🌷ऊर्मिला सिंह

Saturday, 22 September 2018

तृष्णा का सागर...

तृष्णा के सागर में लिप्त मानव स्वयम को भी भूल जाता है।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

सागर  सी  तृष्णा, अंत न  जिसका होता
मृग मरीचिका सी तृष्णा जीवन घेरे रहता
मोह ,माया भौतिक जीवन,अपरमित इक्छायें
हे अनन्त!तेरी दिव्य ज्योति मुझे अपनी,
लघुता का पल छिन है आभास कराये!!

मेरे विकल मन की व्यथा  तेरी करुणा हर लेती!
वाष्प सदृश्य मेरी तृष्णा बादल में घुलमिल जाती!
जीवन के भोग विलास कृतमता का आभास दिलाते
मेरा रोम रोम तेरे दिव्य ज्ञान से आलोकित होता!
आकांक्षाओं के सागर से उबार सही राह दिख लाते!

हेअनन्त आशान्ति के सागर से महाशन्ति की राह दिखाते!!
                🌺🌺🌺🌺
               
                                🌷ऊर्मिला सिंह

Friday, 21 September 2018

माँ भारती

पावन माँ भारती तेरी धरती.....

शस्य श्यामला है सुन्दर धरती..
हर ऋतु का परिधान पहनती...
प्रकृति नटी नर्तन करती जहाँ...
ऐसी पावन है भारत की धरती !!

हर उत्सव के गीत मनोहर...
पल्लव पुष्पों से सुशोभित...
प्राची और प्रतीची पर बनते..
बहु वर्णों से चित्र मनोहर !!

सैलानिओं के मन को भाती...
ये भारत  की  पावन  धरती...!!

कहाँ  सुलभ  होता पर्वों का अभिनन्दन..!
कहाँ सुलभ होता ऋतुओं का ऐसा संगम..!
झरनों का कल-कल ,उदधि का गर्जन...
थके नयन, विरही मन होते  विश्रामित ..!!

बारम्बार वन्दित है भारत की धरती...!
राम ,कृष्ण ,परमहंस की पावन धरती..!!

                                    🌷 उर्मिला सिंह

Thursday, 20 September 2018

सियासत के अंदाज़

सियासतें -अंदाज
***************
पेट की भूख ने रोटी चुरा के खालिया तो उसे चोर  करार कर दिया!
जो मुल्क को डकार गया वो वफ़ादार ही बना रह गया!

मज़हब और इन्सानियत आदमी की फ़ितरत पर रो पड़े!
मज़हब के कंधे का इस्तमाल कर राहोंरस्म का खून कर रहेे!

अपने ज़मीर की बोली लगा रहा आज का इंसान
सियासत में कुर्सियों  की हबस ने क्या से क्याबना दिया!

जिन्दगी आसान कब थी मालिक तेरे  दरबार में
ईमान की चिता सरे आम जल रही जीना मोहाल कर दिया!!
                  ****0****
                                🌷ऊर्मिला सिंह

यादों की घटा.....

यादों की घटा.......

आज यादों की घटा दिल पे छाई है!
नैनो की बारिष भी भिगोने आई है!!

भूल जाओ  हमे,ये हक तुम्हे दिया हमने!
मेरी बात और है रूह से इश्क किया हमने!!

आज फिर मुकम्मल चाँद नज़र आया है!
आज आँखो में अक्स तेरा उभर आया है!!

दिल जीतने की कला में माहिर तो न थे!
वादा निभाने का हुनर इश्क ने सिखाया है!!
                 ****0****
                                🌷उर्मिला सिंह