Friday, 6 January 2023

ऐ दिल आ लौट चलें....

ऐ दिल !आ लौट चलें फिर उस गली 
जो  छोड़ आये थे हम कभी
कुछ लम्हे कुछ पल कुछ यादें...
समेटे अंचल में अपने, गुनगुनाए ।।

ऐ दिल आ लौट चलें फिर उस गली...

वो खुशनुमा शामें गपसप के तराने
छात्रावास की जिंदगी केंटीन के नजारे
सीनियर जूनियर रिश्तों की कहानियां...
भूले नही भूलती छात्रवास की शामेँ.....।।

ऐ दिल आ लौट चलें फिर उस गली

 क्रिसमस की रातें,दीपावली की जगमग
 होली के हंगामें,पिकनिकों की हलचल
 वार्डेन से सिर झुका डाट खाना,मुस्कुराना...
 आज भी याद हैं नादानियों के वो किस्से ....

 ऐ दिल आ लौट चलें फिर उस गली

 भूली उन्मुक्त हंसी,कृतिम मुस्कानअधरों पर
  खो गई जिन्दगी ,जिन्दगी की राहों पर....
 अब न वो दिन रहा न रही महकती बातें
  यंत्र चलित जिन्दगी,अदृश्य हुई सुनहली रातें।।
  
   ऐ दिल आ लौट चलें फिर उस गली...

    जिन्दगी पर बेवजह की बंदिशे ....
    ख्यालों पर शून्यता के लगे पहरे.....
    जिस्म वक्त की चक्की में पिसता रहा...
     हम चांद तारों में गुमसुम उलझे रहे।।

    ऐ दिल आ लौट चलें फिर उस गली....
    जो छोड़ आए थे  जिसे हम कभी.....

                  उर्मिला सिंह


Saturday, 31 December 2022

नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन हो

अभिनंदन है अभिनंदन
 नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है
 ऐसा तुम्हारा आगमन हो
 प्रति पल प्रति क्षण सुन्दर हो
 
 नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन हो
 
  स्वर्णिम सपनों की झंकार
धवल नवल किरणों का श्रृंगार
आशाओं के पंख पसारे....
 मन खुशियों के पांव पखारे
 
 नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन हो

   नई  पहल  नया  सृजन हो
   दुर्गम राहें पर सरल जीवन हो
   उम्मीदों का उजले उजले सपने  ....
   जीवन शाखों पर ऊर्जा हो।।
   
   नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन हो।

     विस्मृत हो कटु स्मृतियां
     विगत जीवन के पन्नों से
     महके वसुधा मुस्कानों से
     हो समाप्त सभी कुरीतियां
     मानव जीवन के प्रांगण से।।
     
     नव वर्ष तुम्हारा अभीनन्दन  हो।

     नव रस नव संदेश का हो आगाज
     नव विश्वास,नव पथ नव परवाज
     नव उत्साह,नव जोश रग रग में बहे
      राष्ट्र धर्म ,सासों का लक्ष्य रहे....।
     .
      नव वर्ष तुम्हारा  अभिनंदन हो।
      
      शुभकामनाएं... ..शुभकामनाएं...
      सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं
      देश का गौरव गान हर दिल में रहे.....
      क्षमा,दया ,करुणा से भरा हरदिल रहे

        नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन हो.....

                     उर्मिला सिंह
     
    

Monday, 12 December 2022

जिन्दगी....

           मंगलमय सुप्रभात🙏🙏
          🌾🌾🌾🌾🌾
            हम खुश हैं तबसे
जमाने के सब रंग अपना लिए जब से
जीने के लिए कुछ तो चाहिए जिन्दगी तुझे
         हर पल में ढाल दिया तुझे।।

       अब न करना गिला कोई मुझसे
     जैसा चाहा वैसा ही बना दिया तुझे
पीछे छोड़ आए दुनिया के गिले शिकवे सारे
     अब न कहना जिन्दगी हम तुझसे हारे।।

               🌷 उर्मिला सिंह🌷

Monday, 5 December 2022

ज्योति पुंज

सुनो ..ज्योति पुंज फिर प्रज्वलित होगा
 तम हारकर जीवन में विश्वास भरेगा...।।

    माना हिय में घनघोर अन्धेरा है
    सूरज पर बादल का पहरा है....
    पवन बहेगा बादल को छटना होगा
    प्राची से सूर्य रश्मियों को हँसना होगा।।

सुनो ..ज्योति पुंज फिर प्रज्वलित होगा....
 तम  हरकर जीवन में विश्वास भरेगा.....।।

   कटिले झाड़ राह तेरा रोकेंगे .....
   जख्मों को देकर ,दिल से खुश होंगे
   पर गुरुर टिका नही किसी का कभी....
   तेरे सत्य के आगे वह भी घुटने टेकेगा..।।
   
सुनो.. ज्योति पुंज फिर प्रज्वलित होगा...
तम हरकर जीवन में विश्वास भरेगा....।।

   सत्य सुचिता क्षमा ही सम्बल होगा
  दया धर्म करुणा राह तुझे दिखायेगा
   संस्कारों की कश्ती बंधी हुई तट पर.....
   आस्था,विश्वास,पथ तेरा अलंकृत करेगा...।।

     सुनो ज्योति पुंज फिर प्रज्वलित होगा....
      तम हरकर जीवन में विश्वास भरेगा.....।।

                   उर्मिला सिंह

Tuesday, 22 November 2022

मन पूछता है.....

कहाँ आसान होता है जीना...
अपनो के कडुवाहट के बाद 
जाने क्यों उनपर फिर भी प्यार आता है
 माना की प्रेम का धागा एक तरफ़ा है
 पर उनकी बेरुखी पर भी प्यार आता है।
 ये दिल की नादानियाँ ही कह लीजिए साहेब
 कि उनकी नफरतों का भी इंतजार रहता है।।


उम्र का तकाज़ा कहें या.....

उम्र का तकाज़ा कहें या कहें नादानियाँ
सोचती हूँ जमाने की हवा को क्या होगया
हिन्द की संस्कृति पश्चिमी सभ्यता की शिकार हुई
या मां भारती के संस्कारों में कोई कमी रह गई।
सनातन धर्म की सभ्यता भूल कर .....,
बर्बादी के रास्तों पर क्यों चल पड़े......।।
ये नए जमाने के  बेटें ,बेटियां......

मन पूछता है...

नारी हो तुम शक्ति पुंज कहलाती हो.......
 अताताइयों को क्यों सिरमौर  बनाती हो....
 प्रेम की भाषा जो समझ सका न कभी....
 उसके ऊपर क्यों व्यर्थ समय गवांती हो 
 मां की देहरी लांघना थी प्रथम भूल तुम्हारी 
 प्यार आह में बदला,क्यों नही आवाज उठाई थी
 नारी दुर्गा काली है, क्या खूब निभाया तुमने....
 पैतीस टुकड़ों में कट कर उस दानव के हाथ
                  जान गवाई.....

मन पूछता है.....

कानून ,अदालत,की धीमी चालें क्यों
.....
राजनीति का रंग चढ़ाती राजनीतिक पार्टियां...
पीड़ा पन्नो पर बिखरती मां बाप के आंसू बहते.....
जंगल जंगल शरीर के हिस्से मिलते......
न्याय की आशा धूमिल पड़ती......
"जनता  के द्वारा जनता के लिए,जनता का"
 सब हवा में उड़ते अम्बर तक अट्टहास  करते
 मन बार बार पूछता है देश के ठेकेदारों से....
  आखिर कब तक...... कब तक.....
  
                उर्मिला सिंह
  
 
       
 
 
 













Friday, 18 November 2022

कुछ भाव बस यूँ ही.....

    जिस नज़ाकत से लहरें
           पावों को छूती हैं
      यकीन  कैसे करूँ  कि ये
           कश्ती डुबोतीं हैं।।
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      जिसे दिल नेअपना समझ कर
                विश्वास किया।।
       उसीने इस दिल में हजारों 
                 नश्तर चुभाया।
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        स्वतंत्रता भी मर्यादित ही,
               अच्छी लगती है ।।
      लक्ष्मण रेखा के बाहर होते ही,
           सीता भी छली जाती हैं।।              
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       आधुनिकता के चमक दमक ,
                जीने की कला नही।।
        जुनुनें इश्क में बन के पागल,
                 जीवन गवाते नही।।
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       धर्म, संस्कार कुल की मर्यादा 
                तुम्ही से होती
       यूँ बगैर सोचे समझे किसी को
              अपना बनातें नही।।
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                  उर्मिला सिंह



                        
                   
                            
                  
                       
                 
 
           
     
                     


       

सभी बाहुबली सभी सिकन्दर हैं

सभी बाहुबली सभी सिकन्दर हैं
सभी राष्ट्रवादी सभी देशभक्त हैं
मुकाबला हो तो किससे हो .....।।

बड़ी मुश्किल में हैं देशवासी
सभी सत्य वादी सभी असत्यवादी
किसी को फ्री की रेवड़ी में विश्वास हैं
कोई लगाता विकास वाद का नारा है।।

सभी बाहुबली सभी सिकन्दर हैं।
 मुकाबला हो तो किससे हो...

कोई पढालिखा कोई फर्जी ईमानदार है
झूठ का झंडा लिए खड़ा महान आप है।कोई'भारतजोडो यात्रा'जीत का मंत्र मानता
ज़बान फिसलना पैदाइसी अधिकार जानता।।

  सभी बाहुबली सभी सिकन्दर है।
  मुकाबला हो तो किससे हो......

 कहीं लाखों में टिकट बेच, मूछों पर देता ताव 
 राजनीति में आज आगया गदरनीति का भाव 
 अपनी झोली भरने को आमदा सभी नेता
 किस सेआस, किसपर विश्वास करें जनता....
 असमंजस में जनता किसे स्वीकार करे.....

      सभी बाहुबली सभी सिकन्दर हैं
      मुकाबला हो तो किससे हो.....।।
 
 महाभारत मचा पार्टियों में, कृष्ण चुपचाप हैं
 किंकर्तव्य विमूढ़ जनता अर्जुन की पुकार है
 दूर दूर तक दुर्योधन ही दुर्योधन दिखते....
 संयम अनुशासन सिसकी लेता चुपचाप है।।
 
      सभी बाहुबली सभी सिकन्दर हैं
      मुकाबला हो तो किस्से हो......।।
        

                  उर्मिला सिंह