सागर लहरें
Monday, 3 August 2026
बन्दे मातरम्
Thursday, 2 July 2026
बस कुछ यूँ ही...
बचपन की यादें उम्र की झुर्रियों तले छुप गई
हम देखते रहें जिन्दगी अपना वजीर चल गई
गिरती दीवारों को सम्हालता कौन है
कँपकपाते हाँथो कोें थामता कौन है
जिन्दगी अच्छी गुजरी,किश्मत की बात है
दर्द में जो गुजरी साहिब कर्मों की बात है!
हंगामा...
जिधर देखो उधर हंगामा.....ही हंगामा
कलियों को देख भौरों में .....हंगामा
रंगों की बौछार आई ...दिलों में ..... हंगामा.....
दुकानों में अबीर गुलाल पिचकारियों का हंगामा
जिधर देखो उधर हंगामा ही ......हंगामा
शादी में बरातियों के जाम का हंगामा
लड़के वालों के मन में दहेज का हंगामा
दूल्हे के दिल में छलकते प्यार का हंगामा
दुल्हन के ह्रदय में बिछुड़ने का हंगामा।।
जिधर देखो उधर हंगामा ही.....हंगामा।
घर में अधिकारों पर सास बहू में हंगामा
पति पत्नी में अहम के टकराव का हंगामा
नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी में विचारों का हंगामा
पास पड़ोस दोस्तों में आगे बढने का हंगामा।।
जिधर देखो उधर हंगामा ही.......हंगामा।
राजनीति गलियारे में कुविचारों का हंगामा
संसद में मारपीट करते सांसदों का हंगामा
मचा है सृष्टि में
जनता में महंगाई बिजली पानी का हंगामा
नेताओं ,दलों में सत्ता हथियाने का हंगामा
गरीबी,बेकारी दूर खड़ी देख रही निःशब्द
वोट किसे देना होगा मचा है मन में हंगामा।।
जिधर देखो उधर हंगामा ही..... हंगामा।
उर्मिला सिंह
Monday, 29 June 2026
चलन दुनिया का
Monday, 22 December 2025
अजीब दुनिया,अजीब लोग हो गए,जो बड़े थे वो आज छोटे हो गए।रिश्ते परिंदे बन उड़ चले.....हम सहमें- सहमें देखते रह गए।रफ़्तार- ए जिन्दगी इस कदर तेज हो गई,जो आगे चल रहे थे वो पीछे हों गए। जिंदगी के सफ़र मेंअकेले रह गए....टूटते..बिखरते..सम्हलते रहगए। स्वार्थी दुनिया केभ्रम में जीते रहे...उम्मीदों का जनाजा,धूम धाम धाम से देखते रह गए। उर्मिला सिंह
Monday, 8 December 2025
हमदर्द
हमदर्द.... ..
अश्कों को हमदर्द बना
दर्द गले लगातें हैं
मुझसे मत पूछो दुनिया वालों
अधरों पर मुस्काने
किस तरह सजातें हैं।।
फूलों की चाहत में
काटों को भूल गए
आहों ने जब याद दिलाया
सन्नाटों से समझौता कर बैठे।।
सन्देह के घेरे में जज्बात रहे
लम्हे अपने,अपने न रहे
फरियादी फरियाद करे किससे
जब कातिल ही जज की ......
कुर्सी पर आसीन रहे....
लफ्जों में पिरोतें हैं
एहसासों के मोती
संकरी दिल की गलियों में
कौन लगाता कीमत इनकी।।
निद्र वाटिका में
अभिलाषाएं मचलती
जीवन से जीवन की दूरी
दूर नही कर पाती हैं....
फिर भी देहरी पर
उम्मीदों के दीप जलाती है।।
उर्मिला सिंह