Friday, 31 December 2021

नव वर्ष स्वागत है....

जा रहा दिसम्बर दहलीज पर खडी जनवरी
जो दर्द झेलें उन्हें सलाम किये जारहा आखिरी
आने वाले वर्ष खुशियों का पैगाम देना.....
मायूस चेहरों को खुशयों की सौगात देना .....
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चलते हुए पाँओं ज़रा ध्यान  दे के चलना 
पाओं की धूल से किसी की मंजिल न रुक जाए।

किसी के अश्कों को जमीं पर गिरने न देना
इंसानियत की बुलंदियों को शर्मिंदा होने न देना।।

मीठे लफ्ज़ जा जादू जहां में बिखेरते रहना
हर मुसीबत सब्र के साथ बर्दास्त करते रहना।।

हर हाल में प्रभु कृपा का गुणगान करते रहना
मायूसियां प्रभु का दिया वरदान समझते रहना।।

राष्ट्र प्रेम से बढ़कर होता नही कोई प्रेम दुजा,
हर सम्बन्ध  राष्ट्र पर उत्सर्ग करते रहना।।

               उर्मिला सिंह

Thursday, 30 December 2021

कुछ भाओं के पुष्प.....

राज-ए दिल न कहो किसी से अजीबोगरीब दुनिया है,
जो दोस्त है कल वही दुश्मन भी हो सकता हैं।
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गुलशन में फूलों  से ही नही कांटों की भी जरूरत होती हैं
जिन्दगी में खुशियां ही नही अश्को की भी  जरूरी होती हैं ।।
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कुछ लोग यादों के गहरे निशान छोड़ जातें हैं
बहार हो या खिज़ा यादों के चिराग जलाजातें हैं।
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जिन्दगी चलते चलते जब थकान से चूर होती है
सांसो से कहती है "दोस्तआ चल कहीं और चले"
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कुछ जख्मों के भरने में देर बहुत लगती है
जख्म देने में जब अपनो की इनायत होती है।
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हौसलों को जिंदा रखने की कोशिस तो कर
जिन्दगी है गर तो ठोकरों से घबड़ाया न कर।
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तेरे कदमों के रफ़तार से मुक़द्दर भी पशेमां होगी
तेरे हौसले की हिम्मत मुक़द्दर को भी  झुका देगी।

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                   उर्मिला सिंह



Wednesday, 22 December 2021

फुटपाथ...

 फुटपाथ बिछौना जिनका,आसमां छत है
          वो जिन्दगी की क्या बात करे।

उम्र तमाम हुई तन में साँस अभी बाकी है
सर्दी गर्मी ठंढ  सहे खेल मौत का बाकी है
सूरज का गुस्सा झेले चाँदनी की उपेक्षा.....
हर मौसम दर्द भरा दर-दर की ठोकर बाकी है।।
    
   जिनका फुटपाथ बिछौना,आसमाँ छत है
        वह जिन्दगी की क्या बात करे।।
 
  जीते जी एक हाथ जमीन को रहे तरसते 
  सहानुभूति भरे शब्दो के लिए रहे मचलते
  किस्मत लिखने वाले से पूछता बावला मन 
  रोटी नमक प्याज के लिए क्यों अश्क झरते ।। 

 जिनका फुटपाथ बिछौना,आसमाँ छत हैं
     वह जिन्दगी की क्या बात करे।

यह दुनिया जिन्दी लाशों से बनी दुनियां है
मौत जहां कुंआ होता,बदबूदार होती गलियां हैं
जहाँ भूख से बिलबिलाते तन, मौत एक दवा है
गरीबों के जीवन की होती यही कहानियां....।।


जिनका फुटपाथ बिछौना आसमाँ छत है
     वह जिन्दगी की क्या बात करें

   जहां सिकुड़ी हुई जिन्दगी सांसे गिनती है
   जहां जिन्दगी जख्मों की तुरपाई करती है  
   जहां किलकारी  से पहले बचपन खत्म होता
   जहां जिन्दगी नित्य जीती  मरती रहती है
   वहा सपनो की  कोई  कैसे बात करे।।

      जिनका फुटपाथ बिछौना आसमाँ छत है
           वह जिन्दगी की क्या बात करे।।  
                     उर्मिला सिंह




Friday, 10 December 2021

शायद दिल में उतर जाए .....

शायद दिल में उतर जाए ....
दिल में ही रहने वाले छुए अनछुए पहलू.....जिससे जान कर भी अनजान रहतें हैं...
       *****0*****

बन्द कमरे में वन्दे मातरम कहना और बात है
वतन पर जिन्दगी बलिदान करना ओर बात है।।
      ****0*****
भलाई का बदला दुवा करके भी दिया करो
दुआ के जरिये मुश्किल वक्त में उसका सहारा बन  जाया करो।।
           ****0****
अच्छी बातें सुन कर ह्रदय पट पर लिखा करो
जो लिखो उसे याद भी किया करो
जो याद करो उसे दूसरों को सुनाया भी करो
 ताकि बुराई का खात्मा,
अच्छाई खुशबू बन  बिखर जाए
सारा संसार ही महक जाए।।
         ****0****
आपसी मतभेदों को मिटा नया इतहास लिखना चाहिए
एकता के गीत गुनगुना कर दिलों को एक करना चाहिए
बन्धुत्व न्याय के आधार पर मंजिल तय करना चाहिए।।
          ****0****
बुद्धजीवी कहते किसे समझ न पाया मन बिचारा
हवा का रुख जिधर देखा उधर लुढ़क जाता बेचारा।।
        ****0****
आंसू का  कतरा कतरा महंगा होता है
कीमत जाने वहीं जिन नयनों से आसूं झरता है।
         ****0****
       उर्मिला सिंह

Tuesday, 30 November 2021

वक्त की महिमा.....

वक्त की बात  क्या कहे 'उर्मिल'
बदलता रहा  रंग वक्त पल-पल।

वक्त के हाथों हँसते रहे रोते रहे
पल-पल जिन्दगी बदलती रही
हम-हम न रहे,तुम -तुम न रहे
जिन्दगी वजूद अपना खोती रहीं।।

लम्हा-लम्हा वक्त सींचते रहे हम
बूंद -बूंद तृष्णा  मिटाते  रहे हम
वक्त अभिमान की चादर उढाता रहा
वक्त का अभियान हमको लुभाता रहा।।

वक्त लम्हा लम्हा पहचान देने लगा
प्रश्न पूछने लगा इम्तहान लेने लगा
वक्त के प्रश्नों का उत्तर  होता नही
सब्र के सिवा पथ दुजा होता नही।।

वक्त से सम्हल सम्हल के रहना सीखो
बेसुरे स्वर सुरों में ढाल के चलना सीखो
वक्त ही था जो श्री राम को राज गद्दी दिया
वक्त ही था जो बनवास का दारुण दुख दिया।।

वक्त की बात क्या कहे 'उर्मिल'
बदलता रहा रंग वक्त पल- पल।।

          उर्मिला सिंह
 
 








Thursday, 4 November 2021

झिलमिल दीपावली....

दीपावली का पर्व हैं... 
मन का दीप जगमगाईये ।
 नैतिकता का तेल डाल...
 भारत को स्वर्ग बनाइये।।

आप सभी मित्रों को दीपावली की शुभकामनाएं।
           💐💐💐💐💐 
            
प्रीत के दीये कि लौ कम पड़ने न पाए कभी.....
खुशियां मिल बाट कर जीने का अवसर है ये ।
तिमिर,उजास में परिवर्तित करने दीपावलीआई
दीपक  कि लौ से आत्मीयता जगाने का पर्व है ये।।
               उर्मिला सिंह

Sunday, 24 October 2021

अदालत अन्तरात्मा की......

   मंगलमय सुप्रभात🙏🏻🙏🏻
     🌼🌼🌼🌼🌼

कभी अन्तरात्मा की अदालत में जाया करिए,
स्वयम को पहचानने में भूल हो न जाए,
हदय को  भी  जरा  खंगाला करिए,
ह्रदय दर्पण है आपकेव्यक्तित्व का... 
इसे भी संवारा  संवारा करिए।।
       💐💐💐💐💐
            उर्मिला सिंह

Friday, 22 October 2021

संवाद-सत्य -झूठ का....

कुछ मन की बातें--सत्य--झूठ की ....
           *****0*****
मैं झूठ हूँ .....
मैं  कीमत मांगता नही छीनता हूँ......
अपनी चालाकी फरेबी हरकतों से...
 मालामाल करता हूँ.......
 मैं सरल हूँ यारों का यार  झूठ हूँ......
 
मैं सत्य हूँ.....
 
दोस्त!मैं सत्य हूँ
 मेरे साथ चलो .....
 तुम्हे कीमत चुकानी पड़ेगी
 राहों में कांटे ही काटें मिलेंगे
 पर सुकून की जिन्दगी मिलेगी
 मैं तुम्हारा सच्चा मित्र हूँ।।

झूठ...

सुकून से पेट भरता नही 
हमारी चाहत में  शामिल नही
 सिर्फ रोटी का एक टुकड़ा....
 हमारी चाह पूरे विश्व को.
है अपनी मुट्ठी में करना ......
 
सत्य....
सत्य के पुजारी के आगे
राम रहीम या हो ईसामसीह
सभी  मस्तक झुकाते हैं
क्यों कि सत्य ही....
अल्ला ,ईश्वर ,ईसामसीह है
झूठ वह बदबू हो  तुम
देवता भी तुमसे दूर हो जातें हैं।।
     💐💐💐💐💐
            उर्मिला सिंह

Monday, 18 October 2021

प्रार्थना का मूल रूप.....

 *****0*****
प्रार्थना जितनी गहरी होगी 
उतनी  ही  निःशब्द होगी
कहना चाहोगे बहुत कुछ 
कह ना पाओगे कभी कुछ।

विह्वल मन होठों को सी देंगे
अश्रु आंखों के सब कह देंगे
संवाद नही मौन चाहिए .....
 प्रभु मौन की भाषा समझ लेंगे।।
      💐💐💐💐💐
                        उर्मिला सिंह

        
       
    
          
 



  
  
 
 
 


 
 
 

Sunday, 17 October 2021

भाओं का गुलदस्ता....

मन के भाव...पन्ने लेखनी के
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बिगड़ रही रीति जगत की
खोया सम्मान ढूढ रही नारी 
अन्तर्मन है प्रभु  की नगरी 
 हाथों में उसके सबकी डोरी।।
          ****0****
 राजनीति अब चौसर बनी 
  नेता सारे बने खिलाड़ी
 चुनाव युद्ध का बिगुल बजा
 छल प्रपंच घोड़ाऔरसिपाही
 शकुनी दुर्योधन,बने खिलाड़ी
 ऊपर बैठे मुस्काते  गिरधारी।।
           ****0****
 उसूल याद नही जिनको 
 कहते हैं अपने को गांधी
 कैसे नेता माने देश उनको 
 बातें करते जो पाकिस्तानी।।
        ****0****
हत्याओं के दौर चल पड़ा
हर दल, दल दल में पड़ा
मानवता का होरहा शोषण
होगा कैसे गरीबों का पोषण।
           ****0****
हर सांस देश के लिए जिए
समर्पित सांसे अपनी करगए 
चाहत नही नाम अरु कुर्सी  की 
राष्ट्रभक्त थे वो अमर होगए।।

      उर्मिला सिंह

Sunday, 10 October 2021

नव दुर्गा नव रूप है रूप अभिन्न

विश्व वन्दिता सर्व पूजिता तेरी जय जय कार हो 
ब्रम्ह रूपणी सर्व मंगला भवानी जय जय कार हो
तेरे नव रूप को मईया जन जन वन्दन करता ....
हाथ खड्ग शेर सवारी दुर्गा तेरीजय जय कार हो।

विश्व वन्दिता तेरी जय जय कार हो.....

देवों की करुण पुकार सुन नौ रूप धरे तुमने
दुष्टों से मुक्ति दिलाने की ठान लिया मां तुमने
वाहन अलग अलग हैं शस्त्र तुम्हारे भिन्न भिन्न
नव दुर्गा हो मां तुम ,रूप तुम्हारा है अभिन्न।।

विश्व वन्दिता तेरी जय जय कार हो....

माता जड़ चेतन के प्रत्येक अंकुरण में तुम हो
पैचासिक वृत्तियों का करती हरण तुम हो
तेरी आराधना से मन गंगाजल से पावन होता
अभिमान मुक्त मानव मोक्ष प्राप्त हो जाता।।

विश्व वन्दिता तेरी जय जय कार हो...

हर दिन नव रूप तुम्हारा नया सन्देसा देता 
अष्टम रूप  तुम्हारा मां महा गौरी का होता
नवम रूप सिद्धिदात्री बन मोक्षदायिनी होती
तेरी महिमा से मां सकल जगत सुख पाता....।।

विश्व वन्दिता माता तेरी जय जय कार हो....

          उर्मिला सिंह







 


Sunday, 26 September 2021

मन की बातें .......शब्दों के सहारे...

मन की बाते.. शब्दों के सहारे......
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राजनीति में कोई किसी का दोस्त नही होता है
हर  किसी में  अहंकार का तूफ़ान मचलता है
ये खेल राजनीति का चल रहा  सदियों से......   
पूज्य हैं जो,उनका गालियों से सम्मान होता है।।

कर दिया दफ़न ज़मीर को  नेता बन गये
प्रवचन देने लगे साधू फ़कीर महात्मा बन गये
चुनाव आते ही नेता जनता के इर्द- गिर्द घूमते
राष्ट्रभक्ति का राग गुंडे भी अलापने लग गये।।

सब्र बड़े सवाब का काम होता,हर पश्न का ज़वाब होता ,
हर काम का अन्दाज लगता,पर सब्र के सवाब का अंदाज नही होता ,
सब्र करने वालों पर प्रभु की रहमत बरसती....
सब्र श्रद्धा,भक्ति जीवन  का मूल मंत्र होता है।।

सत्य  ईश्वर से परिचित कराता ,सत्य जीवन को
खुशियों से भरता
सत्य शान्ति का पाठ पढ़ाये,सत्य वक्त का मरहम होता है।
सत्य पर अडिग रहो सत्य ही सही राह दिखाता
सत्य को भूलो नही सत्य ही ईश्वर सत्य ही ईमान होता।।
                
                   उर्मिला सिंह।










Wednesday, 22 September 2021

सांसों पर पहरा नही अच्छा होता ....

सांसों पर पहरा नही अच्छा होता है
दर्द नासूर बन जाये कहाँअच्छा होता है।।

पत्थरों से सिर टकराने से फायदा क्या...
यहां इंसानियत खुदगर्ज़ इन्सान बहरा होता है।

हर गली कूचों  में सैय्यादों का डेरा है,
सुनहरे पिंजरे में बैठाने का वादा होता है।

पत्ते-पत्ते,कण कण पर जीवन वेद लिखा है
ह्रदय की करुणा में भगवान रहा करता  है ।

 सुख क्षणिक दुख लम्बा  लगता है 
 सत्कर्म  करो जीवन सुखद लगता है।।

फिज़ाओं में मोहब्बत की खुशबू घुली हो,
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा मुस्कुरा उठता है।।
                 उर्मिला सिंह


 






Saturday, 11 September 2021

बमों बारूद के ढेर पर बेठा जमाना है....

जख्मों की इन्तिहा अब होगई
जिन्दगी भी एक इम्तहान होगई।।

 इंसान ही इंसान पर जुल्म करता है
 जहां में प्रभु अब रक्तबीज पैदा करता है।।

होशियारों,फरेबों का बोलबाला है
इंसानी सभ्यता संस्कृति केवल एक बहाना है।

हिटलर से भी ऊंची पदवी मिल गई जिनको
तलवार की नोक पर उनके ज़माना हैं।।

हर जिन्दगी  बमो बारूद के ढेर पर बैठी है
विज्ञान के चमत्कार का विश्व दीवाना है।

           उर्मिला सिंह






Tuesday, 24 August 2021

जग दो दिन का बसेरा....

मत घबड़ा रे मना......
  जग है दो दिन का बसेरा।
 
   जीत कभी तो हार कभी
लहराए कभी खुशयों का समन्दर
   हो जाय घनेरी रात कभी
      मत घबड़ा रे मना।।
      
    फ़ूलों की सौगात कभी
    कभी मीले राह में कांटे
    ये जिन्दगी की राह है प्यारे
    दिखे नही समतल राह यहां।।
       मत घबड़ा रे मना.....

   उड़ जायेगा एक दिन पक्षी
   जल जायेगी ये नश्वर काया
   रह जायेगी तकर्मों की गाथा
  जीवन बीत गया यूँ हीं. मिथ्या....।।
 
   मत घबड़ा रे मना.....
 ये जग है दो दिन का बसेरा।

  कौन है अपना कौन पराया
  समझ न पाया कोई यहां....
  जख्मों की आबादी है...
  लफ्जों में  है घाव यहां....।।

   मत घबड़ा रे मना......
ये जग है दो दिन का बसेरा....।।

     उर्मिला सिंह

Thursday, 19 August 2021

सावन का गीत....मायके में सावन भादो में त्योहारों की झड़ी लगी रहती है ,लड़की को अपने मायके की याद आती है उसी भाव से रचित भोजपुरी रचना है।

सावन भदउवां  में तीज त्योहरवा ....
मनवा करे ला जाईं नैहरवाँ.....

गोरी गोरी कलैया ,हरी हरी चूड़ियां
हथेलिया पर रचैबे मेहंदी का बुटवा
धानी चुनरिया पहिन जाईं नैहरवा....
मनवाँ करेला जाईं नैहरवाँ......

लमवा से देखबे पिया गांव के खेतवा 
लहरात होइहे ओमा पिया हरे हरे धनवां
याद आवे पिया सखिया सहेलियां .. ...
मनवाँ करेला जाईं नैहरवाँ....

निबिया की डलिया ,डालल होइ झुलवा
संग क सहेलियां झूलत होइन्हे झुलवा
झीम झिम बरसत होइन्हे कारे कारे बदरा
कि.. मनवा करेला जाईं नैहरवा....

कजरी के गितिया गुंजत होई दुवरियाँ
मईया उदास कब आई मोर बिटियवा
दुवरे पर ठाढ़ बाबा देखे मोरी रहिया...

कि…मनवाँ करे ला.... जाईं नैहरवाँ
कि मनवा करे ला जॉइन नैहरवाँ......

        उर्मिला सिंह











Friday, 30 July 2021

शाख के पत्ते....

शाख के पत्ते
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झर रहे पात पात
छूट रही टहनियां
कौन सुनगा यहां।
दर्द की कहानियां।

 टूट गये रिस्ते नाते
 रह गई अकेली टहनियां
 धूल धुसरित पात ये
 जमीन पर पड़े
 कोई आँधियों में उड़ चले
 कोई पानियों में भींगते 
 मिट्टी में ही मिल गए।।

पात पात झर रहे
सुनी पड़ीं गईं टहनियां
कौन सुनेगा यहां दर्द की कहानियां।

दिखा रहा तमाशा अपना
जग का सृजनहार यहां
नव कोपलों के आने तक
होगया  वीरान  यहां....
कौन सुनेगा यहां दर्द की कहानियां।

बज रहे नगाड़े, मिल रही बधाइयां
शाखों पर आगई हरी हरी पत्तियां
नव कोपलों से  सुसज्जित शाख
भूल गई विरह वेदना....
कौन सुनेगा दर्द की कहानियां।।

बिखरे बिखरे शब्द है
भाव  खोखले होगये
 रीत जगत की यही...
आने वाले कि उमंग में
भूल गए दर्द की कहानियां...


        उर्मिला सिंह



Tuesday, 20 July 2021

कर्म पथ....

अंतर्मन जागृत हो  ऐसा कुछ यतन करो
कण कण में रमने वाले को पाने का जतन करो।

     मन में सुचिता सद्भाव रहे सदा तेरे
 जीवन पथ आलोकित हो कुछ ऐसा जतन करो।

   कर्म पथ में शूल,कभी पुष्प मुस्काते हैं
शूलों में जीने की आदत हो कुछ ऐसा मनन करो।

     जीवन के तीन पहर तो बीत गए खाली....
अन्तिम प्रहर,सही होजाय कुछ ऐसा चिंतन करो।

    प्रत्येक विधान प्रभु का मंगलमय होता है
 श्रद्धा विश्वास  मन में रहे ऐसा सुमिरन करो।

आसुरी प्रवृति का नाश करुणामय ही करते 
जीवन सुपथ पर चलते रहने का ऐसा यतन करो।

जिस धरती पे जन्म लिया ऋणी रहोगे आजन्म
  सत्ता मोह छोड़ देश हित में कुछ कर्म करो।।
             
              उर्मिला सिंह

   

 






 


   

Saturday, 17 July 2021

सावनी कजरी....

सखि री सावन आयो द्वार...
सखि  री सावन आयो द्वार...
 ताल तलैया छलकन लागे,
 अरेरामा!लहरन लागे धान.......
सखि री सावन आयो द्वार. .   ।।
 
झिमिर झिमिर बदरा बरसे 
तृषित धरा के मस्तक चूमे
पातन बुंदिया मोती बन चमके
अरे रामा!शीतल.... बहत बयार....।।

सखि री सावन आयो द्वार... 


बन उपवन हरिताभ छाए 
शाख शाख लिपट मुस्काये
नाचत मोर पंख फैलाये
पपीहा पीहू पीहू छेड़े तान
सखि री सावन आयो द्वार.... ।।


गलियन गलियन कजरी गूंजत
मिलजुल सखियां  झूला झूलत
कंगना खनकत...,कुंतल बिखरत
पिया की याद बिजुरी सम कौंधत
सखि री सावन आयो द्वार....।।

बैरिन भई कारी बदरिया.....
बौराइल रात अन्हरिया.....
लाख संभालूं धानी अंचरवा
 पुरवइया निगोडी उड़ा लेई जाय.....।।
 
सखि री सावन आयो द्वार..   

     उर्मिला सिंह






 
 
 


     



     
    



 

    
 
    
    
    
   
    
 
 



Thursday, 8 July 2021

नारी मन की वेदना...

मैं हर बार तपी कुंदन बन निखरी
कंटक बन में घिर,पुष्प बनी निखरी
फिर भी कदम थके नही रुके नही..... 
बियाबान में चलती रही चलती ही रही।।

पँखो को काटा छाटा कितनी बार गया
फिर भी हौसलों का पग अविचल ही रहा
घायल मन पाखी उड़ने को बेचैन रहा....
विस्तृत गगन की छाँव में मन रमा रहा।।

थके नही कदम रुके नही चलते ही रहे....

 विश्वासों के मणि मानिक से लबरेज रही
 जितने भी तीर चले रुधिर बहे  ह्रदय में
 उतना ही अडिग विस्वास रहा ह्रदय  में
 दर्द छलकते, अधरों पर मुस्कान रही।।
 
 थके नही कदम  रुके नही चलते ही रहे.....
 
 सौ -सौ बार मरी ,जीने की चाहत में
 इंद्रधनुषी सपनों से अदावत कर बैठी 
 भटक रहा मन अमृत घट की तृष्णा में ....
 जख्मों का  ज़खीरा साथ लिए हूँ बैठी।।

 थके नही कदम रुके नही चलते ही रहे.. 

               उर्मिला सिंह
 

 
   
 

 



Saturday, 3 July 2021

माँ....

माँ'जिन्दगी का नगमा है जो ग़म में सुकून देता है।
मां का आँचल पेड़ की छांव है जो दर्द की धूप से बचाता है।।

मां की ख़ुशबू से सारा जहां महक उठता है....
मां का प्यार वो मशाल है जो सही रास्ता दिखाता है।

माँ का  दिल औलाद की गलतियों को भी माफ़ 
करता हैं।
उसे रुसवा न करना कभी उसके कदमों में स्वर्ग मिलता है।।

             उर्मिला सिंह

Wednesday, 23 June 2021

गजल.....

फ़िर अंधेरे आने न पाए ,रोशनी सम्भल के रहना
चल रहें चालें अंधेरों के मदारी,सम्हल के रहना।।

ये सच है ख़ामोशी की शाख पर ,कडुवे फल नही लगते,
अति ख़ामोशी कमजोरी की निशानी है सम्हल के रहना।।

संघर्षों के बहुतेरे ताप झेलें हैं उजालों की आस में ग्रहण लग न जाये प्रयासों में  सम्हल के रहना।।

भगत सिंह,आजाद ,बोस की कुर्बानियां याद रहे
गिद्ध सी नजरें गडाएँ हैं ,जो देश पर उनसे सम्हल के रहना।

हौसलों की मशाल बुझने न पाये ,पथिक तुम्हारी 
ये कर्म युद्ध की अग्नि है जरा सम्हल के रहना।।

वाणियों से तीर बरसा,बालुवों के महल बनाते ये
फिक्र नही करते जो जलते अंगारों पर चलतेहैं सम्हल के रहना।।

                  उर्मिला सिंह





 


Sunday, 20 June 2021

ग़ज़ल...

बादलों की तरह  होती हैं खुशियां कोई जानता   नही ।
कब कहाँ बरस जाएंगी ये खुशियां कोई जानता नही।।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
बद्दुआएं जुबाँ से ही नही दिल से भी निकल जाती हैं
दुखी ह्रदय के आँसूं  भी बद्दुआ बन जाती है।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
संघर्षों, मुसीबतों, परेशानियों से घबराना कैसा...
सितारे अंधेरों में ही चमकते हैं सोच के  देखना ज़रा।।
 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
परवरदिगार, जुल्म नही करता कभी बंदों पर
अपने
बुराई के अंजाम से  अवगत कराने का भार है उसपे।।
💐 💐💐 💐 💐  💐 💐 💐💐💐💐
    
जिन्दगी-ए सफ़र में  कितना समान रहता है
होतें वे नसीब वाले जिनके संग ईमान होता है।।
                   उर्मिला सिंह
                 💐💐💐💐
 





 

Saturday, 19 June 2021

कोमल सपने...

कोमल सपनो के कोई पंख न काटो
उड़ने दो इनको बन्धन में मत बांधो।।

स्वप्नों को जब आकाश मिलेगा
मन वीणा से सुर गान सजेगा
मेघों से तृप्ति ,किरणों से दीप्ति लिए
स्वप्नों की मेघमाला धरती को सजायेगा।

कोमल सपनो का आरोहण मत रोको
उड़ने दो इनको बन्धन में मत बांधो।।

स्वप्नभाव बीजों का संग्रहालय होता
लहलहाते अंकुरित भाव धरा पर जब
धरती स्वर्ग सम दिखने लग जाती तब
नव सपनों से पुष्पित पल्वित धरा होती।।

कोमल सपनो का अवरोहण न रोको
उड़ने दो  इनको  बन्धन में मत बांधो।।

नव प्रभात नव विहान चाहते हो नव स्वप्न पढ़ो
नव जवान नव भाव नया हिंदुस्तान  चाहते हो
तो संस्कृति संस्कार नव ज्ञान से हिदुस्तान बदलो
राष्ट्र भक्ति को सींमा परिधि में मत बांधो....।।

ये ह्रदय  ज्वार है जो कण-कण में बसताहै
तरुणाई  में देश भक्ति का उबाल आने दो 
नूतन में ढलना है गर तो बन्धन में मत बांधो
तरुणाई को बिछे आँगरों से पर चलकर साधो
 
 
इनके कोमल सपनो के कोई पंख न काटो
सपनो को साकार करो बन्धन में मत बांधो।।

              उर्मिला सिंह





Tuesday, 15 June 2021

तृष्णा तूँ न गई मन से...

निडर तृष्णा ....
 बचपन से जवानी तक रहती है मन में....
 मन क्यों वसीभूत होता है तुझ में
 चेहरे की झुर्रियां बालों की सफेदियाँ
 अनदेखी कर तरुणाई आती है क्यों तुझमे
 जवानी,बुढ़ापे की सोच से दूर रहती
 व्याधियों से ग्रसित रहके भी तूँ जवां दिखती
 मृत्यु से भयभीत भी नही दिखती
 नित  फांसती है सभी को जाल में अपने
 नित नए रूप रंग ले के साथ आती
 मन को भरमाती झकझोरती
 अपने बाहुपाश में जकड़ लेती
 छटपटाता बेबस मन पर लाचार तुझ से।
  मानव की आखिरी  हिचकियों में भी
 क्या साथ रहती है तूँ मन के......
 हो सके तो सपने में  ही 
 आके बता जाना 
 राज अपनी निडरता का मन को मेरे।।
         उर्मिला सिंह
 
  
 

Thursday, 10 June 2021

जिन्दगी का नया सबेरा....

जिन्दगी का नया सबेरा
******************
जिन्दगी का क्या भरोसा
 तूँ  स्वयम प्रकाश उसका
 मत निराश होना कभी मन
 जिन्दगी का होता हर दिन नया सबेरा।।

कुछ बाते अनसुनी सी
कुछ दास्ताँ अनकही सी
किस सोच में है पड़ा तूँ....
जिन्दगी का अहम हिस्सा है तूँ....।।

कदम क्यों रुक गए तेरे
पड़ाव अभी हैं  बहुतेरे
चलता रह चींटियों की चाल से
रूबरू कराएगा वही मंजिलो से....
जो  साथ साथ चल रहा सदा है तेरे।।

खामोशियों में भी एक संदेश होगा
अन्तर्मन को तुझे ही खंगालना होगा
रवि किरण उदयमान होंगी एक दिन...
वही दिन जिन्दगी, तेरा नया सबेरा होगा।।

               उर्मिला सिंह

Monday, 7 June 2021

नज़र...

कतरा के चलते थे जो कभी अपनों की नजर से
तड़पते है मिलाने को नज़रे अब उनकी नजर से।।

बेवफाई की अदा में माहिर थे वो सदा से ही...
कसूर अपना था मिल गई नज़र उनकी नजर से।।

किस्मत की खता कहें या नज़रों काअंदाजे -बयां
लहरें भी पशेमाँ मिला के नजर उनकी नजर से।।

स्मृतियों की झीनी झोली से झांकते पलों की-
नजरें, मिल ही जाती है फिर उनकी नज़र से।

ये नज़रों का खेल है साहिब ज़माने से 
दिल की शमा भी बुझा देतें हैं उनकी नज़र से।।

             उर्मिला सिंह






Tuesday, 1 June 2021

मित्र मंडली। .

मित्र मंडली इम्युनिटी बढ़ाने का स्रोत होताहैं
कभी तोला कभी मासा कभी सवासेर होता हैं।
बिन इनके जिन्दगी स्वाद विहीन रसहीन होती
सच पूछो तो जीने का मज़ा मित्र मंडली में होता है।
                
जीवन का ऑक्सीजन मित्रमण्डली होती है।

रिश्ता न हो जिससे खून का फिर भी प्रिय लगे
दु:ख सु:ख में जिसके कन्धे पे सर रख  चैन मिले
जिसके साथ चलने से थकाने स्वयम दूर होती हों
 रात में जगा कर जिसे परेशानियां सुनाने लगे।

वो दोस्त होते हैं जनाब उसी को दोस्ती कहतें हैं। 

दूर रहते पर दिल के तार एक दूसरे से जुड़े रहते
हँसी ठिठौली जिसके साथ बिंदास कर सकते
बेजान जिन्दगी में जो जान डाल देतें है.....
जिसे देखते अधर पर मुस्कान मन झूम उठता है।

उसे दोस्त कहते हैं ....हां उसी को दोस्त कहतें हैं

मिनटों में गमगीन चेहरे को जो पढ़ लेता है
पलकों के पीछे छुपे अश्को को जो देख लेता हैं
रूठने में भी जिसके प्यार झलकता हो......
शिकवे शिकायते भूल जो गले लग जाता हैं....
 वहीअटूट रिश्ता दोस्ती और दोस्त कहलाता हैं।।


                              .....उर्मिला सिंह







Saturday, 29 May 2021

प्रथम.... पाती

प्रथम  -  पाती ....!!

पात पात हर्षित....
मन- सुमन खिल उठे !
प्रिय! पढ़ी जब हमने प्रथम पाती तुम्हारी... !!

बिन बसन्त के मन,
हो बसन्ती झूमने लगा !
ह्रदय उद्गार पवन संग.. सन्देश भेजने लगा..!
अधखिली कलियाँ भी अंगड़ाई  लेने लगीं...!!

प्रिय!पढ़ी जब हमने प्रथम  पाती  तुम्हारी ...!!

प्रेम पिपासा अधरों पे आकुल...
वीणा बजाती यामनी हो के व्यकुल...
मिलन के स्वप्न उनींदी आंखें सजाती...!

प्रिय!पढ़ी जब हमने प्रथम पाती तुम्हारी ...!!

शब्द-शब्द  प्रीत रंग में रंगने लगे...
शून्य में खोए सुर,आलाप 
आज फिर से स्वर साधने लगे.......!

प्रिय ! पढ़ी जब हमने प्रथम पाती तुम्हारी ...!! 

बदली नज़र आने लगी दुनियाँ ये सारी....
बजती हो जैसे चहुँओर शहनाई...
सांसों में कम्पन,धड़कने रुकने लगी.....!

प्रिय!पढ़ी जब हमने ,
प्रथम पाती तुम्हारी ...!! 
 
          ....उर्मिला सिंह

Thursday, 27 May 2021

हरी भरी बसुन्धरा.....

हरी भरी बसुंधरा नीला आसमाँ है जहां
गीता, रामायण , कुरान, गुरुग्रंथ है जहां
हरी भरी धरती लाज है हिंदुस्तान की........
कौरवों की मन मानी चलने न पाए यहां।।

ईर्ष्या द्वेष से संक्रमित आज की राजनीति
कोविड महामारी में नेता करने लगे विरोध नीति
दुष्प्रचार का झंडा घुमा रहे हैं देश विदेश 
ग्रसित सत्ता रोग से  पीड़ित  विपक्षी हस्तियां
इनके लिए होनी चाहिये नई फड़कती दवाइयाँ।

कोविड विपदा दूर होगी रक्खो विश्वास सभी
हिम्मत हौसला विश्वास,बढाओ अपनों में सभी 
एक, अकेला थक जाएगा मिल चलना होगा 
मातृभूमि की मिट्टी से तुमको वादा करना होगा 
सर्वोपरि राष्ट्र हित,देना होगा देशवासियों साथ।
आज नही तो कभी नही आएगा ये मौका हाथ। 
           
                 उर्मिला सिंह
           *********0*********

              
                   
   
                       
                       


Tuesday, 25 May 2021

कोविड 19 तुम इतने बेशर्म क्यो......

हे कोविड महाराज,
बिन बुलाए मेहमान
अब तो करो प्रस्थान
दाना पानी सब चुक गया
बेबस हुआ अब इन्सान ।
कितनी ख़ातिर किया तुम्हारी
कितने इंजेक्शन  लगवाए
विदेशों  में भी  सरकार ने
तेरे खातिर इंजेक्सन भिजवाए
पर विपक्षी दलों को
 बसुदेव कुटुम्बकम भाव नही भाए।

मास्क, दूरी , हाथ धो- धो कर 
जीना हो गया अब  तो  दूभर
हाथ जोड़ विनती करू तेरी
अब तो पिंड छोड़ो  हम सबकी
क्या इतने आदर से भी 
तेरी प्यास नही बुझती !

भाई - बन्धु , नाती -पोते
फंगस -उजला,काला, लाल, पीला 
बुला रहे बेशर्मी से सबको
वंशवाद को बढ़ावा देते हो -
अब तो निर्मम बख्स दे हम सब को ।

 पर  ये याद सदा रखना
 देवों की यह धरणी है
 विनाश तेरा निश्चित है
 गर्दन मरोड़ , चिकित्सक
 सही जगह तुझको पहुँचाये गा
 कितना भी हांथ पांव मारेगा
 वक्षस्थल  चीर , खून तेरा पीने
 एक बार फिर नरसिंह अवतार आएगा ।।
      ******0******
                        .....उर्मिला सिंह


 

Friday, 21 May 2021

कर्म ही तेरी पहचान है

कंटकमय पथ तेरा सम्भल सम्भल कर चलना है !
चलन यही दुनिया का पत्थर में तुमको  ढलना है! 

उर की जलती ज्वाला से  मानवता जागृत करना, 
जख्मी पाँव से नवयुग का शंखनाद करना है !!

 हरा सके सत्य को हुवा नही पैदा जग में कोई
असत्य के ठेकेदारों का,पर्दाफास तुझे  करना है !

वक्त से होड़ लगा पाँवों के छाले  मत देख !  
कर्मों के गर्जन से देश को विश्वास दिलाना है

दृग को अंगार बना हिम्मत को तलवार ......
दुश्मन खेमें में खलबली हो कुछ ऐसा करना है !!

तुम सा सिंह पुरुष देख भारत माँ के नयन निहाल
कोहरे से आच्छादित पथ, कदम न पीछे करना है 

मिले हुए शूलों को अपना रक्षा कवच बनाना है 
कर्म रथ से भारत का उच्च भाल तुझे करना है !!

                          ****0****
                                              
                      🌷उर्मिला सिंह
                                               








Wednesday, 19 May 2021

कृष्ण के दीवाने हो गये.....

गीता पढ़ना तो विगत कई सालों से था परन्तु उस भाव से नही बस......पढ़ना है -थोड़ा ज्ञान में वृद्धि करने के लिए....
             पर पढ़ते- पढ़ते न जाने कौन से भावों में दृढ़ संकल्पित हो कर पढ़ने लगी ,मुझे पता ही नही चला । किसी भी चीज की गहराई में जब हम जातें हैं कुछ भाव मन में उठते हैं जो आनन्द दायीं महसूस होतें हैं ।
             वही भाव आप सभी के समक्ष रख रही हूँ....
                       ******0*****

कृष्ण सोच में....
कृष्ण भाव में
कृष्ण शब्द शब्द में रचे
कृष्ण ह्रदय में
कृष्ण नयन में
कृष्ण धड़कनों में रम गये।।

कृष्ण जिह्वा पे....
कृष्ण रोम रोम में....
कृष्ण को निहारते ...
कृष्ण को पूजते......
कृष्ण के दीवाने होगये.....।।

कृष्ण कर्म प्रवाह में.....
रवि के प्रखर पकाश में
चन्द्रिका की चांदनी में....
गोपियों के रास में....
कृष्ण बांसुरी की तान में....
कृष्ण से सम्मोहित जन - जन होगये.....।।

कृष्ण गीत में ...
संगीत में....
राधिका के नि: स्वार्थ प्रीत में...
मीरा के  सरल भक्ति में...
गोपियों के हास में परिहास में
कृष्ण यमुना के नीर में
कृष्ण कहते-कहते प्रेममय होगये....।।

द्रौपदी के चीर में
देवकी की पीर में
यसोदा के ममत्व में
कण-कण में व्यप्त कृष्ण....
भाव में विभोर.....
नयनअश्रु ढरक गए.....
कृष्ण कहते कहते कृष्णमय होगये।।
        💐💐💐💐

          उर्मिला सिंह




 

Sunday, 16 May 2021

ऐसी कुछ नेकी करो.....

ऐसी कुछ  नेकी करो,जान न पाये कोय,
साक्षी दीनदयालु हों,घट- घट वासी जोय।।

मीठी वाणी कष्ट  हरे,कड़वी तीर समान।
काँव-काँव कौवा करे, करे न  कोई मान।।

करुणा ह्रदय राखि के,करियो सगरे काज,
 अन्तर्यामी देख रहा,वही रखेंगा लाज।।

काम क्रोध मद मोह में,फँसा हुवा संसार,
इनसे मुक्ति कैसे मिले,दिखे न  कछु आसार।।

गृहस्थ धर्म  कर्म है,करो कर्म दिन रात,
सुमिरन मन करता रहे,इतनी मानो बात।।
             ******0******
                             उर्मिला सिंह

         

Friday, 14 May 2021

राघव नाम की महिमा.....

राघव नाम की महिमा,गाओ सुबहो शाम,
हरि कृपा तुझे मिलेगी,कष्ट हरेंगे राम।।

प्रभुनाम ताबीज है ,ह्रदय बांधलो गाँठ,
पतझड़ बसन्त वही हैं,याद रहे ये पाठ।।

तेरा मेरा कुछ नही, जीवन है उपहार
इंसानियत ह्रदय बसे,रखना यही विचार।।

सुख दुख में सम रहे,हिय में रहें न 'मैं' भाव
सद्गुणों को उन्नत करो,मन में रख सद्भाव।।
  
 प्रेम प्रीत की चादरी,ओढ़े जब इंसान
 राग द्वेष सब भूल गये उपजा हिय में ज्ञान।।
           💐   💐    💐     💐
                                  उर्मिला सिंह
                  


   

























Wednesday, 12 May 2021

अदृश्य शत्रु.......

बेवज़ह घर से निकला न करो
हवाएं क़ातिल हैं समझा करो
मुख पे पर्दा दूर -दूर रहा करो
हवाएं कातिल हैं समझा तो करो।।

दुश्मन बड़ा निर्मम चलाक है दोस्तों
आगोश में लेने को हवाओं में छुपा है
तुमभी चलाकी से रहा करो दोस्तो
हवाएं कातिल हैं समझा तो करो।।

हाथ धोते रहो साबुन से दोस्तों
गरम पानी का सेवन किया करो
गिलोय जूस पी-के इम्युनिटी बढ़ाया करो
हवाएं कातिल हैं समझा तो करो।।

वेक्सिनेशन में देरी न किया करो
भस्मासुर को भस्म करने युक्ति करो
अपनो को अपनो से जिसने दूर किया
कोविड की आखिरी सांस का क्रिया कर्म करो
हवाएं कातिल है समझा तो करो दोस्तों।।1क

अदृश्य शत्रु को भगाना ही होगा दोस्तों
मिल जुल के दर्द को पीना ही होगा दोस्तों
फिर सुनहली भोर की किरणें मुस्काएँगी
जिन्दगी फिर से गुनगुनायेगी दोस्तों।।

एकता की शक्ति से दुश्मन को हराना है
उम्मीदों की दिया से कोविड को जलाना है
नेताओं के अनर्गल प्रवाह में न आना दोस्तों
अन्तर्मन की शक्ति से सभी को जगाना है
फिर वही त्योवहार की खुशिया मनाना है।।
         ******0******0*******
                        उर्मिला सिंह




Saturday, 8 May 2021

'माँ'

     माँ.....

ममता का अथाह सागर है तूँ
संवेदना भावना की मूरत है तूँ
वर्षा की ठंढ़ी बयार सी .....
सन्तप्त तनमन पर शीतलता की फुहार है।।

माँ शब्द गरिमामय प्रेममय होता है
जिसने माता कहकर पुकारा....
न्योछावर उसी पर हो जाता है 
तभी तुझे ईश्वर का रूप कहा जाता है।।

हे !जन्म दात्री हे!संस्कार दात्री ....
तेरा स्पर्श,मीठी बोली मन को साहस देता
आज भी जीने की ऊर्जा तुझसे मिलती है।
नही है तूँ ...फिर भी आसपास लगती है।।

तेरा प्यार त्याग समर्पण और दुलार
शब्दोँ में बांध नही पाता मन लाचार
अश्रुपूरित नयन शत शत नमन करतें हैं
तेरे अनमोल आशीष सदैव रक्षा करते हैं।।

          उर्मिला सिंह



Friday, 7 May 2021

जिन्दगी चन्द सांसों का खिलौना है..

जिन्दगी चन्द सांसों का खिलौना है
कदम  कदम  पर करना यहां  समझौता है

खुशियां गिरवी होती हैं वक्त के हांथों में
इंसा सुख दुख के ताने बाने में उलझा रहता है।

एहसासों की कीमत कौन यहां समझता है
आँसूं खारे पानी सा जम जाया करता है।।

 टुकड़ों में बटी जिन्दगी को जीना कहतें हैं
जीवन पल पल के घावों को समेटा करता हैं।।

जिन्दगी कर्ज है जीने का,चुकाना है इसे यहीं 
गीली आंखों के सपने अंचल में समेटा करता है।।
                 ******0******
                  उर्मिला सिंह










Tuesday, 4 May 2021

बीते हुवे लम्हों.......

बीते हुए लम्हो जरा लौट के आजाना
अधरों की खोई मुस्कान लिए आजाना।।

खुशियों से भरी महफिल 
हंसते दिन  हँसती राते 
शामों की रंगीन झलक दिखला जाना
बीते हुवे लमहों ज़रा लौट के आजाना।।

माना गम की धूप है छाई.....
जीवन में रिक्तता भर आई
अम्बर से आशाओं की बारिष कर जाना
बीते हुवे लम्हो जीवन रंगीन बना जाना।।

धीरज की बाती से दीप जला
होगा फिर सूरज का उजाला
खिलती कलियां भौरें की गुन-गुन देजाना
बीते हुवे लम्हों ज़रा लौट के आजाना

फिर त्योहारों की धूम मचे
फिर खुशियों की रंगोली सजे 
घण्ट,शंख की पावन ध्वनि सुना जाना
बीते हुवे लम्हे ज़रा लौट के आजाना।।
बीते हुए लम्हे ज़रा लौटा के आजाना।।
      💐******💐*******💐
            उर्मिला सिंह
















Saturday, 1 May 2021

सन्नाटा.....

दुख दर्द तबाही से जी घबड़ाता है
सन्नाटों की चीखों से मन अकुलाता है
तबाही  का ये आलम क्षण-क्षण....
जीवन से दूर बहुत दूर ले जाता है।।

धर्म कर्म की बातें अब नही लुभाती
हाहाकार,रुदन का रौरव धरा हिलाती है
सूर्य किरण में आभास क्रंदन का दिखता है
चाँद सितारों की बातें फीकी लगती हैं।।

मानवता की कौन सुने दुहाई  यहां
दानवता का तांडव  हो रहा यहां....
वेक्सीन की कीमत हुई हजारों के पार 
वैक्सिन,ऑक्सीजन पर हो रहा संग्राम।।
असहाय,बेबस दिख रहा यहां  इंसान ।।

फिर भी उम्मीदों की डोर अभी सांसों में हैं
आशाओं का सम्बल  हिय के तारों में है
ऐसा कोई चमत्कार करो दुनिया के मालिक.....
तेरी रचना का अन्त न हो,सांसों के मालिक।।

बहुत दिखाया तबाही का आलम,अब और नही
मरघट सी उदासी की छाया प्रभु अब और नही
खोई खुशियां जग की फिर से लौटा दे दाता....
गर सच है,जीवन मरण तुम्हारे हाथों में ....
तो...अब और नही.....प्रभु!अब और नही.....
               ******0******

                       उर्मिला सिंह
             



 

Saturday, 24 April 2021

शब्दों के रंग अनेक......

शब्द  भाओं के पृथक-पृथक पुष्प होते हैं।

आंखे गीली होती हैं शब्दों को पीड़ा होती है
लेखनी ख़ामोश सी चलती रहती है......
शब्दों की सिसकियां पन्ने भिगोते रहतें है
शब्द सिहरते,बिखरते शब्द भी पीड़ित होते हैं
 

शब्द प्यार के मोती तो शब्दों में शूल होतें हैं
शब्दों में ही दुश्मन, शब्दों में मीत होतें हैं
शब्दों में नफ़रत शब्दों में संवेदना होती है
शब्दों में भक्ति  शब्दों में ही श्रद्धा होती है ।।

शब्द गुदगुदाते शब्द हंसाते शब्द आंसूं लाते
शब्द रूठों को मनाते,शब्द विश्वास की डोर होते
शब्द भाओं के  असंख्य पुष्प होतें हैं
शब्द कोमल सुन्दर और भाउक होतें हैं।

शब्द  अजर अमर होते गीता रामायण होते
शब्दों का सम्मान करें उनको आत्मसात करें
नित नये शब्दों का आविष्कार करें.......
शब्द अनमोल होतें वाणी की पहचान होतें हैं।।

शब्दों की जुबान होती,व्यर्थ न समझो इनको
शब्द इंसां के जख्मों पर मरहम का काम करते।।
        ********0*******0*******
                   उर्मिला सिंह







 

Friday, 16 April 2021

ख़ुशनुमा शहर....

खुशनुमा शहर कोविड के साये में घिर गया।
परिन्दा भी शहर का अब खामोश सा लगता है।।
 
जिस शहर की सड़कें कभी रात में सोती न थी।
 अब,अनजाना मायूसियों का साया भटकता है।।

दूरियां ऐसी बढ़ी की नजदीकियां तरसने लगी।
बाहर बढ़ते कदम देहरी पर ठिठकने लगता है।।

एक जलजला करौना का,आतंक बन छा गया।
मन हरवक्त अनचाही आहट को सुनता है।।

बन्द कमरा बेनूर सी जिन्दगी जिये जा रहे इंसान।
सन्नाटों में बसन्त का मौसम पतझड़ लगता है।

टेलीविजन आँसुओं,सिसकियों का सागर दिखाता है।
आशाओं का महल खण्डहर सा बिखरने लगता है।।
शाम आती चली जाती मिलने को हर दिल तरसता है।
कहां वो दोस्ते कहाँ वो महफ़िल अब सपना सा लगता है।।
            **********0**********
                                  उर्मिला सिंह

Tuesday, 13 April 2021

नव रात्रि तथा नव वर्ष मंगलमय हो...

मधुमास देगया नव रात्रि, नव वर्ष मंगलमय हो

मधुमास देगया सभी को नव वर्ष मंगल मय हो
      भूल जाएं विक्रम 2077 के गम को
     गुड़ी पड़वा मनाये शुभ मंगल मय को।ज्ञानमय,ज्योतिर्मय शांतिमय हमसबका देश हो।
     
     शक्ति का आव्हान, शक्तिमय देश हो
     अन्न से भरपूर धरा,आदर्शपूरित देश हो
अवनी,अम्बर प्रफुल्लित ,जन- जन में प्रेम हो।   

नव सृजन,नव उद्घोष नव चेतना का प्रकाट्य हो।
      दुर्दिन के बादल छटे मन संगीत मय हो
     जूही बेला खिले रजनीगन्धा की महक हो
प्रफुल्लित, हर्षित देश का नव वर्ष मंगल मय हो।
            ********0********
                  उर्मिला सिंह     
      

Friday, 26 March 2021

होली का रंग......

कान्हा ना कर......
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कान्हा ना कर मों संग बरजोरी 
छुप छुप देखत सखियाँ मोरी
लाल गुलाल रंग भई चोली 
नख सिख डूबी प्रीत रंग में तोरी! 

कान्हा ना कर मों संग बर जोरी..........

प्रीत रंग से दूजा रंग न कोई,
अब न चढ़े लाल गुलाबी कोई 
छोड़ दे नटखट नर्म कलाई 
यूं ना कर कान्हा जोरा  जोरी! 

कान्हा ना कर मों संग बरजोरी....... 

बाज रही पाव पैजनियाँ मोरी 
चमकत मुख पर नथुनियां मोरी 
बजा प्रीत रस की आज बाँसुरिया....... 
तब खेलूँ  तुझ संग होली सावरिया.... 

बांकी चितवन से न देख साँवरिया
कान्हा ना कर मों संग जोरा जोरी।।
          *****0******
         उर्मिला सिंह




Saturday, 20 March 2021

भाओं का गुलदस्ता......

सही फैसले पर अटल रहना कामयाबी की निशानी होती है।
फैसला करके भूल जाने वालों से मंजिल दूर होती है।।

सूरज अंधेरा दूर करता है,पर अंधियारी रात भी होती है।
अज्ञानता के अंधकूप को ज्ञान की रोशनी दूर करती है।।

 महलो में बैठ कर झोपड़ियों की बातें अच्छी   लगती है 
 दर्दे-गरीबी को क्या जानो जो रातों में मजबूर सिसकती है।।
 
भूखे नङ्गे बच्चों के तस्वीरों की कीमत आंकी जाती है
फुटपाथ भूख से मरते बच्चों की बस्ती होती है।।

जिस आबो हवा में रहते हैं क्या बतलायें क्या क्या सहतें हैं।
रोटी महंगी,आंसूं की कीमत सस्ती होती है।।

स्वार्थ,नफ़रत की हवा किसी वायरस से कम कहाँ होती।
एक अमनो चैन छीनती दूसरी जिन्दगी मग़रूर
 करती है।।


              उर्मिला सिंह

Tuesday, 16 March 2021

प्राण पखेरू....

प्राण पखेरू जब उड़ गए ....
अश्रु पूरित नैन, सब देखते रह गए।

ढह गई अभिमान की अट्टालिकाएँ
द्वेष ,ईर्ष्ययाग्नि से, मुक्त आत्माएं
ये जगत किसका रहा है ,सोचो जरा.....
पंचतत्व की काया पंचतत्व में मिल गए।।

अश्रु पूरित नैन, सब देखते रह गए...।

मृग तृष्णा सदा छलती रही  उम्र को
भटकती काया बांहों में आसमाँ भरने को
अनमोल जिन्दगी निरर्थक ही रही जगत में
अंत समय कर्मों की भरपाई करते रहगये।।

अश्रू पूरित नैन,सब देखते रह गए....।
         
एक मुट्ठी राख आखिरी दौलत रह गई 
वो निशानी भी अंततः प्रवाहित होगई 
दया करुणा इंसानियत होतीअचल संपत्ति
जन्म मृत्यु अटल सत्य,चिरनिद्रा में विलीन होगये।।
अश्रु पुरित नैंन ,सब देखते रह गये।
            उर्मिला सिंह

Wednesday, 3 March 2021

चलो साथ -साथ चलते हैं हम...

चलो साथ-साथ चलतें हैं हम...
जिन्दगी दुबारा मिलें न मिले
कुछ जख़्मों को तुम भूल जाओ 
कुछ जख़्मों को हम भूल जाएं ।

चलो साथ-साथ चलतें हैं हम...!

तुम हो तो हम हैं हम हैं तो तुम...
बँधी जिन्दगी तुमसे फिर क्यों हो चुप
फिर ये मौसम और हम,संग -संग हो न हो
उन लम्हो में अकेले रह जाएंगे हम।

चलो साथ-साथ चलते हैं हम...!

यादों का कारवाँ पूछेगा जब तुमसे
कहाँ छोड़ आये  हम सफ़र को अपने
कैसे उससे आँखे मिलाएंगे हम
उन हसीन लम्हों को क्या भूल पाएंगे हम।

चलो साथ साथ चलते हैं हम....!

चाँदनी रात, हाथों में हाँथ
रश्क़ करता जिसे देख कर चाँद
गिरह यादों की खुल जाएगी जब
बार- बार ख़ुद को कोसेंगे हम।

चलो साथ साथ चलतें हैं हम...!

अहम के भँवर में फसे जिस्म दो
किनारे छूने को तरसते हैं वो....
तोड़ कर अहम की जंजीरें.....
सप्त भाँवरों की कसमें निभातें हैं हम।

चलो साथ-साथ चलतें हैं हम...!!

                         उर्मिला सिंह


Tuesday, 23 February 2021

चित्रकार.....

चाहे बनाओ चाहे मिटाओ तुम
तेरे हाथों की बनी तेरी तस्वीर हैं हम
तेरी रचना का नन्हा सा दीपक हैं हम 
चाहे जलाओ चाहे बुझाओ तुम।।

जाने  चित्र कितने बनाते हो तुम
पँचरंगो से सजा के भेजते हो तुम
वक्त की डोर का उसे कैदी बना .....
हाथों में श्वास डोर रखते हो तुम।।

चाहे बनाओ चाहे मिटाओ तुम
तेरे हाथों की बनी तेरी तस्वीर हैं हम।।

कर्म की भित्ति पे सुख दुख उकेरे
डाल देते हो अथाह सागर में तुम
नन्ही सी बूँद छूती मोह माया का किनारा
नये जग में विस्समोहित करते हो तुम।।

फँसाते उसे मोहमाया के बन्धन मे तुम
तेरे हांथो से बनी तेरी तस्वीर हैं हम।

प्रज्ञाचक्षु खुलने से पहले 
तृष्णा के मरुस्थल में घुमाते हो तुम
अनगिनत कामनाओं के शूल
ह्रदय की वादियों मे उगाते हो तुम

शूलों की सेज सजाओ या बचाओ तुम
तेरे हाथों से बनी तेरी तस्वीर हैं हम।।

जीवन की कश्ती मंझदार में पड़ी
तूफ़ानी लहरें राह रोके खड़ीं.....
ऐ चित्रकार! तुमको पुकारे तुम्हारी कृती
अब तो आगई बिदाई कीआखिरी घड़ी।।

चाहे उबारो चाहे डुबाओ तुम
तेरे हांथो की बनी तेरी तस्वीर हैं हम।।
      💐💐💐💐💐💐
         उर्मिला सिंह






















Sunday, 21 February 2021

बसन्त शुभ हो......

बसन्त शुभ हो
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नव आस नव बिस्वास
बाटने आगया बसन्त
फूलो से सुसज्जित धरा,
रंगों से दिशाएं सज गईं
इंद्रधनुष सा सौंदर्य बिखेरता
आगया ऋतुराज बसन्त।।
पीत वसन हुई धरा
पीले सरसो के खेत
अमराई में कोयल कुहके
मंजरी से लदे आम के पेड़
शुभ हो जनजीवन को बसन्त

बसन्त का अप्रतिम त्योहार.....
शुभ हो उन्हें जिनके विचार
पतझड़ से नग्न हो चुके
उनके कुंठित विचारों को
विभिन्नता में एकता की
समरसता मिले.....।।
शुभ हो उन्हें जिनके
शब्द रसहीन हो चुके
उन शब्दों के गागर
प्रीत अनुराग से छलक उठे
बसन्त शुभ हो उन्हें....
जो एक होकर भी एक न हो सके
राग द्वेष के दुष्चक्र में
अपने अन्दर के छुपे 
आनंदके स्रोत्र को सुखा बैठे
उनके अंदर.....
सरस् कोमल भावों के पुष्प
ह्रदय की वादियों में ख़िलादें
फागुनी हवाओं की मस्ती में
फाग के गीत गुनगुना उठे।।

बसन्त ज्ञान की देवी 
मां सरस्वती की पूजा ऋतु है
हर देहरी करुणा कीअल्पना सजे
बसन्त के रंग गहरे हों इतने
हर गली कूचे सुनहरे हो उठे
भावों की मंजरी से ....
माँ शारदे को नमन करें.....

बसन्त शुभ हो उन्हें भी....
जो बसन्त को अनुभव न कर सके
आनन्द वंचित ह्रदय को .....
बसन्ती आनन्द की अनुभूति हो
बसन्त शुभ हो.... शुभ हो....शुभ हो।।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐



       उर्मिला सिंह

Saturday, 20 February 2021

दुनिया की रीति यही है.....

ये दुनियाँ एक झमेला है
लगा यहां झूठों का मेला है
मत उदास हो ऐ मेरे मन
इस अज़ब दुनियाँ में .....
जो सच्चा है वही अकेला है।।

         उर्मिला सिंह

Wednesday, 10 February 2021

गज़ल

नित नए षणयंत्र रचकर उसे रुलाना चाहता है
 वो ईमानदारी की राह चल मुस्कुराना चाहता है।।
  चमन की हर शाख पर घात लगाए बैठेहैं उल्लू 
वो हौसलों के तीर से चमन बचाना चाहता है।।

   तुम लाख डुबोना चाहो कश्ती उसकी
  तूफ़ानों का आदी तूफानों से खेलना जनताहै।।

 आँखों के छलकते आंसूं इंसानियत की जुंबा है 
 सतकर्म से इन्सानियत का संदेश देना चाहता है।

 छल बल  से सत्ता पाने की चाह में मशरूफ़ तुम
 वो शहीदों से मिली दौलत सहेजना चाहता है।।

माना कि झूठ के शोर में सत्य कराहता रहता
मानो न मानो सत्य देर सबेर जीतना जनता है।

हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और हुवा करते हैं
वो तुम्हारी चालबाजी को नाकाम करना जानता है।।

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                                       उर्मिलासिंह

 



 

Friday, 5 February 2021

तेरी इक नज़र के सवाली हैं

जिंदगी तेरी हर बात निराली है 
मुट्ठी बन्द आती ,जाती हाथ खाली है।

ओरत का झुकना उसे ऊचां स्थान देता है
फलो ,फूलों से भरी झुकती वही डाली है।

जिधर देखो वहीं आदमी रंगबिरंगा है
हर चेहरा लगता यहां पर जाली है।

तरसता जो छप्पर और रोटी को
उसे क्या समझ चाँदनी है या रात काली है।

ऐ मालिक!तेरे गुलशन की हालत क्या हो रही
पतझड़ ही नज़र आता तेरी इक नज़र के सवाली है।

                  उर्मिला सिंह



Sunday, 31 January 2021

गजल

जिन्दगी तुम मुझे यूं ख़्वाब दिखाया न करो
तिश्नगी है बहुत उजालों की आस दिलाया न करो।।

 करूं शिकवा भला कैसे शिकायत हो गई जिन्दगी
 मलहम भी कांटो की नोक से लगाया न करो।

 हिय की व्यथा मौन रखना लाज़मी होता है
 जिसे गुलशन समझा उसे सहरा बनाया न करो।

 उल्फ़ते -- सुकून कहते किसे अनजान रहा सदा
 बहारों में पतझड़ को कभी मुस्कुराने दिया न करो।

वक्त के दिए जख्मों का  क्या हिसाब दू जिन्दगी
तिनका तिनका सा अब यूं बिखराया न करो।

                     उर्मिला सिंह   





 

 

Tuesday, 26 January 2021

बन्दे मातरम

जब हम मना रहे गणतंत्र दिवस थे
अम्बर छू रहा तिरंगा था
हर भारतवासी का मस्तक
भारत के गौरव से ऊंचा था।

पर गिरी गाज इक ऐसी
शर्मिंदा दसों दिशाएं हुईं
जोअन्नदाता  कहते थे अपने को
राष्ट्र प्रेम किंचित मात्र नहीं था उनको।।


उपद्रवी किसानों ने ऐसा खेल खेला
तार तार हुई धरा लालकिला रोया
अपनों ने ही छाती पर वार किया
फूट फूट कर मां भारती का दिल रोया।।

पर चाल नहीं चलने पाएगी
मुठ्ठी भर देश के गद्दारों की
अखंड भारत अखंड  रहेगा
 राष्ट्रप्रेम सर्वोच्च है जीवन में
 बच्चा,बच्चा तुझपर कुर्बान रहेगा।।
          उर्मिला सिंह

              बन्दे मातरम











Saturday, 16 January 2021

देश तुम्हारा है सरकार तुम्हारी है.....

देश तुम्हारा है सरकार तुम्हारी है...
        *****************
अपनी ढपली अपना राग ,वैमनष्य का बीज बोना है
किसान महज़  बहाना  है सत्ता की कुर्सी  निशाना है
सुलझाने की कौन कहे उलझाने वाले बैठे बहुतेरे यहां
हर कार्यों में नुक्स निकालो विपक्ष का यहीं याराना है।

मौका परस्त ,बबूल के कांटे जैसे फैल रहे हिन्दोस्तान मे
मर्यादाहीन शब्दों के नारे लगते अन्नदाताओं के दरबार में
जिद्द की आड़ ले मख़ौल उड़ाते सरकार और कोर्ट का..
कोई तो पूछो  ऐसे अन्नदाता हुए कभी क्या इस देश में।

विचारोंमें  शुद्धता  विनम्रता भारत देश की पहचान है 
अन्नधन से भरता देश का भंडार वह देश का किसान है
शतरंज की बाजी बिछाए हारजीत का खेल चल रहा यहां...
सर की चम्पी पैर की मालिश क्या किसान करवाता यहां?


अधिकार है धरना देना तो कर्तब्यओं का भी निर्वाह करो
 दुहाई  प्रजातन्त्र की देते हो तो बच्चों जैसा अड़ना छोड़ों
 देखो समझो बात करो सरकार तुम्हारी है देश तुम्हारा है 
 भारत माँ का गौरव धूमिल हो मत ऐसा कोई काम करो।।

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                         उर्मिला सिंह





Wednesday, 13 January 2021

मकर संक्रांति....

आप  सभी  को  मकरसंक्रांति  की बहुत बहुत बधाई
तिल गुड़ के लड्डु,खाकर पतंग  उड़ाओ बहनों भाई
पर्व बड़ा अलबेला है नास्ता दूध दही अरु चिवड़ा है
खाने को मिलती खिचड़ी संग में पापड़ दही और चटनी।।

बिहू लोहडी मकरसंक्रांति और पोंगल अनेको इसके नाम 
इसी लिए तो कहा गया है विविधता भरा भारत देश महान
तिल गुड़ की खुशबू याद दिलाती हमको अपना प्यारा गांव
एक दूसरे के साथ चल पड़ते सभी प्रातः करने गंगा नहान 

इंद्र धनुष सा अम्बर रंग बिरंगी लहराती तितली सीपतंग
अन्नदान करता किसान खुशयों का वैभव मुस्काताआँगन
तिल गुड़ की मीठास घुलजाये हिंदुस्तान के कोने कोने में
द्वेषभाव भूल गले मिले प्रफुलित, समृद्ध रहे भारत वर्ष ।।
                       💐💐💐💐
                     उर्मिला सिंह

                         

Thursday, 7 January 2021

आज की सच्चाई ----बोलती कलम

आज की सच्चाई---बोलती कलम

विवेक पर अविवेक का आधिपत्य होता जारहा है
सत्यता पर असत्यता अभिशाप बनता जारहा।

भौतिकता की तपिश मेंआत्मीयता जलती जारही
संवेदनाओं से सिसकियों का स्वर सुनाई पड़ता जारहा ।

बेशक इन्सान ने तरक्की बेहिसाब किया है
सरलता सादगी भोलेपन से दूर होता जारहा ।

बहुजन हिताय ,स्वान्तः सुखाय हो गया अब
वोट हासिल करना एकमात्र ध्येय होता जारहा

इन्सान निर्ममता की पराकाष्ठा पर पहुंच गया
हैवानियत के सांचे में ढल बर्बरता अपनाता जारहा।।

लालच ,अभिमान की केंचुली ऐसी चढ़ी पर्त् दर पर्त्
भले बुरे का भान नही ,ख़ुद की जड़े खोदता जारहा।।
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                     उर्मिला सिंह














   


Saturday, 2 January 2021

भावों,शब्दो से बना........" गुलदस्ता -ए-गज़ल"

 गरीबों से मोहब्बत भगवान की इबादत है
 मां बाप की दुवाएं जिन्दगी की अमानत है।।

  अपने स्वाभिमान को सर्वदा जगाए रखना
  जन्मभूमि की मिट्टी का कर्ज अदा करते रहना।।

  उजाले बाटने की ह्रदय में सदा  चाहत रखना
  इंसानियत का यही उसूल है जहां को बताते रहना।

  मोहब्बत की खुशबू से दिल को सजाये रखना
  तन्हाईयों को उन्ही यादों से गुलज़ार करते रहना।।

  उम्र भर दिलों को जीतने की हसरत रहे 
  नफ़रतों के नही, मोहब्बत के जाम छलकाते रहना।

  कोइ मज़हब नही सिखाता कत्ले आम करना
  ख़ुदा के बन्दे हैं सभी बन्दगी का पैगाम देते रहना।।

  गुनाहों के अंधेरों को हटाओ दिल आईना बन जाए
  शांति सुकून सौहार्द की मशाल देश में जलाते रहना।।
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                     उर्मिला सिंह
  

 
  
  
 

Friday, 1 January 2021

नव वर्ष20-21

जल थल नभ में हुंकार भरे भारत के रणबाँकुरे नव वर्ष में
सींमा पर दुश्मनों के होश उड़ा दें देश के जवान नव वर्ष में
शान्ति सौहार्द प्रेम की गंगा बहें लहराए झंडा तिरंगा शान से
देशभक्ति सर्वोपरि हो जन जन केह्रदय में सर्वदा नववर्ष में।

                      उर्मिला सिंह

नव वर्ष20-21

तम  को  चीरता  नव  वर्ष आया
धरा पर किरणों ने रंगोली सजाया।

उल्लसित हैं दिशाएं.....
चहुं ओर आल्हाद छाया
अभिनन्दन नव वर्ष,नव उजास आया।

तम को चीरता नव वर्ष आया....

खड़ा नव वर्ष बांहें  फैलाये
नव उमंग नव आशाये लिए
पीछे मुड़ के देखना क्या....

सभी का नव चेतना से शृङ्गार करने
तम को चीरता देखो नव वर्ष आया।।

मायूसियों को छोड़ आगे बढ़ो
नई चुनौतीया संघर्ष है सामने
सपने साकार करने का वक्त आया

नई जिज्ञासाएं लिए नव वर्ष आया
तम को चीरता देखो नव वर्ष आया

दिलों से नफ़रतों का साये हटें
मोहब्बत से लबरेज़ दिल रहे
धानी चुन्दर पहन लहलहाएे धरा 

यही अभिलाषा लिए नव वर्ष आया
तम को चीरता देखो नव वर्ष आया

नेताओ में राजनीति के गलियारे में
सुचिता पारदर्शिता का माहौल बने
देश के नव विकास में सभी सहयोगी बने

यही सन्देश लेकर  नव वर्ष आया
तम को चीरता देखो नववर्ष आया


             *****
                     उर्मिला सिंह