Saturday, 24 April 2021

शब्दों के रंग अनेक......

शब्द  भाओं के पृथक-पृथक पुष्प होते हैं।

आंखे गीली होती हैं शब्दों को पीड़ा होती है
लेखनी ख़ामोश सी चलती रहती है......
शब्दों की सिसकियां पन्ने भिगोते रहतें है
शब्द सिहरते,बिखरते शब्द भी पीड़ित होते हैं
 

शब्द प्यार के मोती तो शब्दों में शूल होतें हैं
शब्दों में ही दुश्मन, शब्दों में मीत होतें हैं
शब्दों में नफ़रत शब्दों में संवेदना होती है
शब्दों में भक्ति  शब्दों में ही श्रद्धा होती है ।।

शब्द गुदगुदाते शब्द हंसाते शब्द आंसूं लाते
शब्द रूठों को मनाते,शब्द विश्वास की डोर होते
शब्द भाओं के  असंख्य पुष्प होतें हैं
शब्द कोमल सुन्दर और भाउक होतें हैं।

शब्द  अजर अमर होते गीता रामायण होते
शब्दों का सम्मान करें उनको आत्मसात करें
नित नये शब्दों का आविष्कार करें.......
शब्द अनमोल होतें वाणी की पहचान होतें हैं।।

शब्दों की जुबान होती,व्यर्थ न समझो इनको
शब्द इंसां के जख्मों पर मरहम का काम करते।।
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                   उर्मिला सिंह







 

Friday, 16 April 2021

ख़ुशनुमा शहर....

खुशनुमा शहर कोविड के साये में घिर गया।
परिन्दा भी शहर का अब खामोश सा लगता है।।
 
जिस शहर की सड़कें कभी रात में सोती न थी।
 अब,अनजाना मायूसियों का साया भटकता है।।

दूरियां ऐसी बढ़ी की नजदीकियां तरसने लगी।
बाहर बढ़ते कदम देहरी पर ठिठकने लगता है।।

एक जलजला करौना का,आतंक बन छा गया।
मन हरवक्त अनचाही आहट को सुनता है।।

बन्द कमरा बेनूर सी जिन्दगी जिये जा रहे इंसान।
सन्नाटों में बसन्त का मौसम पतझड़ लगता है।

टेलीविजन आँसुओं,सिसकियों का सागर दिखाता है।
आशाओं का महल खण्डहर सा बिखरने लगता है।।
शाम आती चली जाती मिलने को हर दिल तरसता है।
कहां वो दोस्ते कहाँ वो महफ़िल अब सपना सा लगता है।।
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                                  उर्मिला सिंह

Tuesday, 13 April 2021

नव रात्रि तथा नव वर्ष मंगलमय हो...

मधुमास देगया नव रात्रि, नव वर्ष मंगलमय हो

मधुमास देगया सभी को नव वर्ष मंगल मय हो
      भूल जाएं विक्रम 2077 के गम को
     गुड़ी पड़वा मनाये शुभ मंगल मय को।ज्ञानमय,ज्योतिर्मय शांतिमय हमसबका देश हो।
     
     शक्ति का आव्हान, शक्तिमय देश हो
     अन्न से भरपूर धरा,आदर्शपूरित देश हो
अवनी,अम्बर प्रफुल्लित ,जन- जन में प्रेम हो।   

नव सृजन,नव उद्घोष नव चेतना का प्रकाट्य हो।
      दुर्दिन के बादल छटे मन संगीत मय हो
     जूही बेला खिले रजनीगन्धा की महक हो
प्रफुल्लित, हर्षित देश का नव वर्ष मंगल मय हो।
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                  उर्मिला सिंह