Wednesday, 13 July 2022

गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर.......

आस्था दीप जला सदगुरु वाक्यों का अनुकरण करो....
'तुलसी' की  पूजा करने  वालों, 'गंगा' के गीत लिखो

कटीली टहनियों पर भी खिलते हैं महकते फूल,
दुश्मन की हथेली पर भी प्रेम गीत लिखो।

इधर उधर की बातें छोड़ दिल की बात सुनो,
तम की बात नही चाँदनी के गीत लिखो।

दर्द पराया महसूस कर, इंसान कहाने वालों,
इन्सानियत की कलम से प्रेम के नवगीत लिखो।

नये जमाने की चकाचौन्ध मेंभूलेसस्कृतिअपनी,
दादी-अम्मा के रीत -रिवाजों के स्नेहसिक्तसँगीत लिखो।
            *******0********
               उर्मिला सिंह

8 comments:

  1. बहुत सुंदर, गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. हार्दिक आभार आपका भारती जी

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-07-2022) को चर्चा मंच     "दिल बहकने लगा आज ज़ज़्बात में"  (चर्चा अंक-4492)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

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    1. ह्रदय से आभार मान्यवर, हमारी रचना को चर्चा मंच पर रखने के लिये।

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  3. नये जमाने की चकाचौन्ध मेंभूलेसस्कृतिअपनी,
    दादी-अम्मा के रीत -रिवाजों के स्नेहसिक्तसँगीत लिखो।
    काश!लोग समझ पाते इन भावनाओं को। बहुत ही सुन्दर गीत,सादर

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  4. इधर उधर की बातें छोड़ दिल की बात सुनो,
    तम की बात नही चाँदनी के गीत लिखो।
    बहुत हुई तम की बाते और तम ही बढ़ रहा
    अब उजालो की चाँदनी ही बाते हो...
    बहुत ही सुंदर ...सार्थक सृजन ।

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  5. नये जमाने की चकाचौन्ध मेंभूलेसस्कृतिअपनी,
    दादी-अम्मा के रीत -रिवाजों के स्नेहसिक्तसँगीत लिखो....वाह!वाह!!!और वाह!!!!

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