Friday, 7 August 2020

इंसानियत का उजाला हो तो बेहतर है.....

दिल की गलियों में इंसानियत का उजाला हो तो बेहतर है
करुणा,प्रेम रस से ह्रदय सिंचित हो तो बेहतर है।

कलह से भरा घर भला खुशियों से आबाद कहाँ होता है
रिश्तों में खुसबू-ए वफ़ा त्याग की बुनियाद हो तो बेहतर है।

किसी के अवगुणों की चर्चा में वक्त जाया नही करते
अपनी कमियों पर  भी एक नजर डालो तो बेहतर है।

ख्वाइशों के चक्रव्यूह में उलझना नादानी के सिवा कुछ नही
सामर्थ देख कर अपनी गठरी बाधते तो बेहतर है।

गुज़रे वक्त के दामन पर लिखी कहानियां राहें सुझाती हैं
सम्भल कर चलते ,गद्दार धोखे बाजों से तो बेहतर है।।

खामोशियाँ भी तन्हाइयों से बहुत कुछ बता जाती हैं
बस समझने वाला प्यारा सा एक दिल हो तो बेहतर है।।

               उर्मिला सिंह



11 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 09 अगस्त 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. ह्रदय से आभार आपका हमारी रचना को चर्चा अंक में शामिल करने के लिए।

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (09-08-2020) को     "भाँति-भाँति के रंग"  (चर्चा अंक-3788)     पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद डॉ. रूपचंद शास्त्री जी हमारी रचना को चर्चा अंक में शामिल करने के लिए।

      Delete
  3. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. ह्र्दयतल से आभार आपका ओंकार जी

      Delete
  4. बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  5. बस समझने वाला प्यारा सा एक दिल हो तो बेहतर है,
    वाह दी लाजवाब! हर शेर उम्दा/बेहतरीन।

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्नेहिल धन्यवाद प्रिय कुसुम।

      Delete
  6. किसी के अवगुणों की चर्चा में वक्त जाया नही करते
    अपनी कमियों पर भी एक नजर डालो तो बेहतर है। बहुत खून ! लाख टके की बात लिखी अपने आदरणीय दीदी |

    ReplyDelete