Thursday, 6 August 2020

जिह्वा पर प्रभु नाम रहे.......

जिह्वा पर प्रभु  नाम  रहें  , नैनो में  रघुनाथ
सिय की छवि ह्रद में बसे, लखन हनु रहें साथ।।

सत्कर्मों में मन लिप्त रहे,जीवन का हो ध्येय
दीन  दुखी के  कष्ट हरें, कभी न सोचे हेय।। 

प्रीत डोर ऐसी बन्धे ,जैसे चाँद चकोर
दूर से निरखत रहें,प्रीत करें पुरजोर।।

मिट्टी  चन्दन है  देश की , माथे  लेउ  लगाय
देश हित प्राण उत्सर्ग हो,जन्म सफल होजाय।।

सुख दुख खेल जीवन का,फँसा हुआ हर कोय
कर्म क्षेत्र यहीं तुम्हारा ,बिन कर्म मुक्ति ना होय ।।      
                   *****0*****
                                        उर्मिला सिंह          


12 comments:

  1. सुंदर दोहे...
    उत्कृष्ट रचना ..
    💐💐

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  2. गागर मे अमाय रहा सागर
    उत्तम वचनो से गूँथे हार

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (०८-०८-२०२०) को 'मन का मोल'(चर्चा अंक-३७८७) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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  4. अनिता सैनी जी सर्वप्रथम शुभप्रभात ...
    हमारी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए ह्रदय से धन्यवाद।

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  5. बहुत सुन्दर।
    दोहे तो नहीं हैं ये।

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  6. इसी लिए मैंने दोहे नही लिखा मान्यवर।

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  7. बहुत खूब,बेहतरीन अभिव्यक्ति,सादर नमन

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  8. आभार मान्यवर आपका।

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  9. वाह बहुत सुंदर दोहे दी।

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रिय अनुराधा बहन।

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  11. जीवन के विभिन्न रंगों को संजोते सुंदर दोहे आदरणीय दीदी | आखिर अध्यात्म और मोक्ष ही तो जीवन का परम लक्ष्य है | सादर -

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