Sunday, 30 August 2026

'माँ शब्द छोटा है परन्तु.......

'माँ '
         बहुत छोटा शब्द हे मां
    प्यार, त्याग ममता की मूरत है माँ 
             🍁🍁🍁🍁🍁
         जब हम छोटे होते थे 
        और चोट लग जाती थी
      हम मां को पुकारा करते थे।।
 
     माँ आके चुप कराती थी 
     चुम्मी देके हमें कहती थी
  कुछ नहीं हुआ ठीक हो जाएगा।।

     और हम पुनः खेलने लगते थे 
      माँ पर अटूट विश्वास जो था
   माँ की बात भला झूठी हो सकती है।।
 
        वक्त बदला लोग बदले
        शायद हम भी बदल गए
    तभी तो माँ की बातों से विश्वास उठा।।

          माँ आज  नहीं है
       चोट लगती है आज भी
     हृदय रो पड़ता है मां कह के
       पर अब मां नहीं आती
खामोश लब भिंगे नयन और तन्हाइयां 
     पर अब माँ नहीं आती. कहने
'कुछ नहीं हुआ बेटा सब ठीक हो जाएगा '।।
             
           🌹उर्मिला सिंह🌹

1 comment:

  1. मॉं शब्द ही संपूर्ण रचना है।
    भावपूर्ण सुंदर रचना दी।
    सादर।
    --------
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १ सितम्बर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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