Sunday, 30 August 2026

'माँ शब्द छोटा है परन्तु.......

'माँ '
         बहुत छोटा शब्द हे मां
    प्यार, त्याग ममता की मूरत है माँ 
             🍁🍁🍁🍁🍁
         जब हम छोटे होते थे 
        और चोट लग जाती थी
      हम मां को पुकारा करते थे।।
 
     माँ आके चुप कराती थी 
     चुम्मी देके हमें कहती थी
  कुछ नहीं हुआ ठीक हो जाएगा।।

     और हम पुनः खेलने लगते थे 
      माँ पर अटूट विश्वास जो था
   माँ की बात भला झूठी हो सकती है।।
 
        वक्त बदला लोग बदले
        शायद हम भी बदल गए
    तभी तो माँ की बातों से विश्वास उठा।।

          माँ आज  नहीं है
       चोट लगती है आज भी
     हृदय रो पड़ता है मां कह के
       पर अब मां नहीं आती
खामोश लब भिंगे नयन और तन्हाइयां 
     पर अब माँ नहीं आती. कहने
'कुछ नहीं हुआ बेटा सब ठीक हो जाएगा '।।
             
           🌹उर्मिला सिंह🌹

Monday, 3 August 2026

बन्दे मातरम्

*बन्दे मातरम्*

धरती की मौन व्यथा समझे कौन... 
सूरज की मौन लिपी समझे कौन....
जो बाट रहे खण्ड-खण्ड में देश  को
ऐसे गद्दारों को देश प्रेम समझाएं कौन!
 🍁🍁🍁🍁🍁
केंचुल-सा आवरण हटा...
भ्र्ष्टाचारी सब एक हुए 
इसी प्रेम ने सबको आलिंगनबद्ध किये...
 राजनीती का स्तर गिरा, हो रहा तांडव नृत्य...
जाल झूठ का बुनते हुए
 कर रहे हैं ये कुकृत्य! 
   🍁🍁🍁🍁🍁
विषधारी तेरे फन से सत्य का आस्तित्व बड़ा ...
झूठ की ज्वाला में तेरे पूर्वजों का आदर्श जल रहा....
असत्य इतना न उछाल कि पराजय बन जाय तेरी...
जला सके प्रहलाद को
 कोई जग में ऐसा ताप नही...।
 🍁🍁🍁🍁🍁            
कर्म तुम्हारा जनता सब जानती है....
तुम कितने पानी में हो जनता पहचानती है...
झूठ कीआंधी ज्यादा दिन टिकती नही...
मकसद तो  केवल तुम सबका सत्ता पाना है!
   🍁🍁🍁🍁🍁
 देश के दुश्मनो ,सावधान जनता सब जानती ..है !
हर तीर तुम्हारा सत्य से टकरा 
वापस तेरे पास ही जायेगा... 
क्योंकी.......
जनता षडयंत्र तुम्हारा सब जानती है.....।
             उर्मिला सिंह 
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